कैमूर: 80वीं आजादी की वर्षगांठ पर उपेक्षित रहा शहीद स्तूप, शिलापट पर अब भी दर्ज है नाम

Updated:
विज्ञापन

स्वतंत्रता सेनानी शिलापट्ट (स्तूप स्थल)पर नही दिखा राष्ट्रीय ध्वज | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

कैमूर के दुर्गावती प्रखंड में शहीद स्तूप पर स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण नहीं हुआ। शिलापट पर आज भी रोहतास जिला अंकित है, प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल।

विज्ञापन

Kaimur News : देश शनिवार को आजादी की 80वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा था. सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में शान से तिरंगा फहराया जा रहा था, लेकिन दुर्गावती प्रखंड मुख्यालय स्थित स्वतंत्रता सेनानी शिलालेख स्थल यानी शहीद स्तूप इस राष्ट्रीय पर्व पर भी उपेक्षित नजर आया. पुराने प्रखंड भवन के समीप स्थित इस ऐतिहासिक स्थल पर 15 अगस्त को ध्वजारोहण नहीं किया गया. स्तूप पर केवल एक माला चढ़ी नजर आयी. इसे लेकर क्षेत्र में स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति के प्रति महज औपचारिकता निभाये जाने की चर्चा रही.

विज्ञापन

जिस स्थल पर कभी फहराया जाता था तिरंगा, आज वहीं पसरी है उपेक्षा

शहीद स्तूप पर पूर्व में स्वतंत्रता दिवस और अन्य राष्ट्रीय पर्वों के मौके पर ध्वजारोहण किया जाता था. समय के साथ प्रखंड मुख्यालय का स्वरूप और कार्यालयों की व्यवस्था बदल गयी, लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति से जुड़ा यह स्थल उपेक्षित रह गया. तस्वीर में भी स्तूप के आसपास का परिसर और स्मृति स्थल बदहाल स्थिति की कहानी बयां करता नजर आया.

जिला बदल गया, लेकिन शिलापट पर आज भी दर्ज है रोहतास

इस ऐतिहासिक स्थल की एक और विडंबना सामने आयी है. जिस समय दुर्गावती प्रखंड रोहतास जिले का हिस्सा था, उस समय स्वतंत्रता सेनानियों के नाम वाले शिलापट पर रोहतास जिला अंकित किया गया था. बाद में कैमूर जिला अस्तित्व में आया और दुर्गावती इसका हिस्सा बन गया, लेकिन शिलापट पर आज तक रोहतास की जगह कैमूर अंकित नहीं किया गया. यानी प्रशासनिक सीमाएं और सरकारी भवन बदल गये, लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति से जुड़ा शिलालेख दशकों पुरानी स्थिति में ही खड़ा है.

एक ही परिसर में अन्य विभागों में हुआ ध्वजारोहण

इसी प्रखंड परिसर में नवनिर्मित आइटी भवन में प्रखंड मुख्यालय, अंचल कार्यालय समेत कई महत्वपूर्ण कार्यालय संचालित हैं. शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कार्यालयों में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कर्मियों की मौजूदगी में पूरे सम्मान के साथ ध्वजारोहण किया गया. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब इसी परिसर में अन्य सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा फहराया जा सकता है, तो स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में स्थापित शहीद स्तूप को यह सम्मान क्यों नहीं मिला.

स्थानीय लोगों ने संरक्षण और नियमित ध्वजारोहण की उठायी मांग

क्षेत्रवासियों का कहना है कि स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले स्थानीय सेनानियों की स्मृति को केवल शिलापट और एक माला तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए. ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण, नियमित साफ-सफाई और राष्ट्रीय पर्वों पर सम्मानपूर्वक ध्वजारोहण प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए. लोगों ने शहीद स्तूप के जीर्णोद्धार और इसके आसपास बेहतर व्यवस्था की मांग की.

80वीं वर्षगांठ पर भी सम्मान का इंतजार

विडंबना यह है कि देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है, लेकिन आजादी की लड़ाई के स्थानीय नायकों की स्मृति में बना यह शहीद स्तूप आज भी सम्मान और संरक्षण की बाट जोह रहा है. प्रखंड की सीमाएं और सरकारी भवन भले बदल गये हों, लेकिन शिलापट पर दर्ज पुराना जिला नाम और राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण की उपेक्षा यह सवाल छोड़ जाती है कि स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत की सुध आखिर कब ली जाएगी.

स्वतंत्रता सेनानी शिलापट्ट (स्तूप स्थल)पर नही दिखा राष्ट्रीय ध्वज | Prabhat Khabar Network
स्वतंत्रता सेनानी शिलापट्ट (स्तूप स्थल)पर नही दिखा राष्ट्रीय ध्वज | Prabhat Khabar Network


आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन