सुविधा. जिले के 70 विद्यालयों में खुलेगी सखी सहायता डेस्क

Updated at : 11 Jan 2026 4:45 PM (IST)
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सुविधा. जिले के 70 विद्यालयों में खुलेगी सखी सहायता डेस्क

किशोरियों की स्वास्थ्य समस्याओं का स्कूल स्तर पर होगा समाधान

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किशोरियों की स्वास्थ्य समस्याओं का स्कूल स्तर पर होगा समाधान प्रत्येक विद्यालय में एक महिला शिक्षिका को दिया जायेगा प्रशिक्षण राज्य परियोजना निदेशक ने 25 जनवरी तक संचालन का दिया निर्देश भभुआ नगर. किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक बदलावों व स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए अब छात्राओं को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा. जिले के लगभग 70 माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में सखी सहायता डेस्क की स्थापना की जायेगी. इसके लिए शिक्षा विभाग द्वारा जिले को लाखों रुपये की राशि आवंटित की गयी है. इस डेस्क के माध्यम से छात्राओं की स्वास्थ्य समस्याओं को न सिर्फ सुना जायेगा, बल्कि स्कूल स्तर पर ही उनके समाधान की भी व्यवस्था की जायेगी. इस संबंध में राज्य परियोजना निदेशक द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र जारी कर 25 जनवरी तक हर हाल में सखी सहायता डेस्क का संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. पत्र मिलते ही जिले में इसकी तैयारी शुरू कर दी गयी है. योजना के तहत चयनित विद्यालयों में एक विशेष कोना या कमरा तैयार किया जायेगा, जिसे प्रेरक पेंटिंग व सकारात्मक संदेशों से सजाया जायेगा. यहां छात्राओं के बैठने व परामर्श के लिए टेबल, कुर्सी, अलमारी व फाइल कैबिनेट की व्यवस्था रहेगी. इसके लिए प्रति विद्यालय 5 हजार से 10 हजार रुपये तक खर्च करने का प्रावधान किया गया है. प्रखंडवार उन विद्यालयों का चयन भी कर लिया गया है, जहां सखी सहायता डेस्क खोले जाने हैं. एनिमिया से बचाव पर फोकस, टी-3 फॉर्मूला से होगा इलाज सखी सहायता डेस्क का मुख्य उद्देश्य किशोरावस्था में छात्राओं को होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं, विशेषकर एनिमिया यानी खून की कमी से बचाव करना है. आमतौर पर देखा गया है कि किशोरावस्था में खून की कमी होने से आगे चलकर युवतियों व महिलाओं को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में समय रहते सही जानकारी, परामर्श व उपचार बेहद जरूरी है. योजना के तहत प्रत्येक विद्यालय में एक महिला शिक्षिका को नोडल टीचर बनाया जायेगा, ताकि छात्राएं बिना किसी संकोच के अपनी समस्या बता सकें. जिन विद्यालयों में महिला शिक्षिका उपलब्ध नहीं हैं, वहां किसी पुरुष शिक्षक को यह जिम्मेदारी दी जायेगी. इन शिक्षकों को जिला स्तर पर ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया जायेगा, जिससे वे छात्राओं को सही मार्गदर्शन दे सकें. एनिमिया की जांच व इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से विद्यालयों में विशेष कैंप लगाये जायेंगे. यहां टी-3 यानी टेस्ट, टॉक व ट्रीटमेंट फॉर्मूले पर काम किया जायेगा. पहले छात्राओं का हीमोग्लोबिन टेस्ट किया जायेगा, फिर खानपान की आदतों पर चर्चा की जायेगी और आवश्यकता पड़ने पर आयरन की गोलियां देकर इलाज सुनिश्चित किया जायेगा. इसके अलावा विद्यालयों में किशोरी स्वास्थ्य दिवस भी मनाया जायेगा, जिसके लिए अलग से एक हजार रुपये की राशि दिये गये हैं. सखी सहायता डेस्क पर सेनिटरी पैड भी उपलब्ध रहेंगे व उनके सही उपयोग व स्वच्छता को लेकर छात्राओं को विशेष जानकारी दी जायेगी. कुल मिलाकर यह पहल छात्राओं के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी. बोले अधिकारी इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान विकास कुमार डीएन ने बताया कि सखी सहायता डेस्क खोलने के लिए प्रखंड वार विद्यालयों का चयन कर लिया गया है. पहले चरण में जिले के लगभग 70 माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में यह डेस्क शुरू की जायेगी. चयनित विद्यालयों के शिक्षकों को शीघ्र ही प्रशिक्षण दिया जायेगा. प्रशिक्षण पूरा होते ही सभी विद्यालयों में सखी सहायता डेस्क प्रभावी रूप से कार्य करने लगेगी.

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