समय से प्रीपेड मीटर रिचार्ज नहीं होने से विद्यालयों में बिजली गुल
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 05 Jan 2025 8:59 PM
विद्युत विभाग द्वारा जिले के अधिकतर विद्यालयों में अब प्रीपेड मीटर लगा दिया गया है. प्रीपेड मीटर लगने के कारण प्रीपेड मीटर का रिचार्ज समाप्त होते ही विद्यालयों में बिजली सप्लाई ठप हो जा रही है
भभुआ नगर. विद्युत विभाग द्वारा जिले के अधिकतर विद्यालयों में अब प्रीपेड मीटर लगा दिया गया है. प्रीपेड मीटर लगने के कारण प्रीपेड मीटर का रिचार्ज समाप्त होते ही विद्यालयों में बिजली सप्लाई ठप हो जा रही है, जिसके कारण आइसीटी लैब व पानी उगलने वाले सबमर्सिबल सहित कई कार्य प्रभावित हो जा रहे हैं. इधर, विद्यालयों में लगाये गये प्रीपेड मीटर को रिचार्ज करने के लिए प्रधानाध्यापकों द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र भेज कर मार्गदर्शन की मांग की गयी है कि किस मद से प्रीपेड मीटर का रिचार्ज किया जाये. दरअसल, विभागीय निर्देश के आलोक में जिले के अधिकतर विद्यालयों में विद्युत विभाग द्वारा प्रीपेड मीटर लगा दिये गये हैं. प्रीपेड मीटर लग जाने के कारण रिचार्ज समाप्त होते ही बिजली सप्लाई बंद हो जा रही है. इससे विद्युत सप्लाई बंद होने के चलते विद्यालयों में अंधेरा फैल जा रहा है, तो वहीं कई योजना जैसे छात्रों को पढ़ने के लिए लगाये गये कंप्यूटर सहित अन्य योजना बाधित हो जा रही है. इसके चलते प्रधानाध्यापक सहित छात्र-छात्राएं भी परेशान है. हालांकि, शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यालय में कंपोजिट ग्रैंड की राशि भेजी गयी है, इससे प्रधानाध्यापक प्रीपेड मीटर को रिचार्ज कर सकते हैं = छात्रों को पेयजल की हो रही समस्या विद्यालयों में बिजली सप्लाई बंद होने से छात्रों को पेयजल की समस्या सहित मध्याह्न भोजन भी प्रभावित हो रही है. इधर, प्रीपेड मीटर का रिचार्ज खत्म होने के बाद विद्युत आपूर्ति बंद हो जाने को लेकर सदर प्रखंड के सैथा विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन देकर गुहार लगायी है. प्रधानाध्यापक ने दिये गये आवेदन में कहा है कि दिसंबर महीने से विद्युत विभाग द्वारा विद्यालय में प्रीपेड मीटर लगाया गया है. प्रीपेड मीटर लगाये जाने के बाद रिचार्ज के अभाव में विद्यालय में विद्युत आपूर्ति बाधित है, जिसके कारण आइसीटी लैब व सबमर्सिबल बंद रहने के कारण बच्चों के पास पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो गयी है. हालांकि, इस तरह का एक ही विद्यालय का मामला नहीं है, कई विद्यालय के प्रधानाध्यापकों ने इस तरह का मामला दर्शाते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन दिया है.
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