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पीएम आवास योजना में गड़बड़ी : मजदूरों को अब तक नहीं मिला पारिश्रमिक

Updated at : 23 Sep 2025 10:35 PM (IST)
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पीएम आवास योजना में गड़बड़ी : मजदूरों को अब तक नहीं मिला पारिश्रमिक

लाभुकों को मिली पूरी किस्त, पर मजदूरों के हाथ खाली

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भभुआ शहर. प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराना है. योजना के तहत चयनित लाभुकों को किस्तों में राशि दी जाती है, जिससे वे अपना घर बनवा सकें. भभुआ प्रखंड की रूइया पंचायत और कूड़ासन पंचायत में इस योजना के तहत घर तो बना दिये गये, लेकिन मजदूरों को अब तक उनकी मजदूरी नहीं मिली है. इससे लाभुकों और मजदूरों में नाराजगी व्याप्त है. रुइया पंचायत के लाभुक समशू नेशा, सुकृति देवी, आशा देवी, धारदेखिया देवी, तबस्सुम बीवी, मोतीलाल बिंद, एकलाग अंसारी, छेदी बिंद, सागरी देवी तथा कूड़ासन पंचायत के लाभुक सरोजा देवी, राजेश प्रजापति, मधुसूदन साह और रीनू देवी सहित अन्य ने बताया कि योजना की पूरी किस्त मिल गयी और घर भी बनकर तैयार हो गया, लेकिन निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को मेहनताना अब तक नहीं दिया गया. मजदूरों ने बताया कि वे रोजाना मजदूरी की राशि पाने के लिए लाभुकों के दरवाजे पर चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पैसे नहीं मिलने से परिवार चलाने में कठिनाई हो रही है. जब इस मुद्दे को लेकर वे प्रखंड कार्यालय पहुंचे, तो कर्मियों ने फाइल में सब कुछ “कंप्लीट” दिखा दिया. यानी कागजों में भुगतान हो चुका है, लेकिन असलियत में पैसा मजदूरों तक पहुंचा ही नहीं है. मजदूरों का कहना है कि वे दिन भर मेहनत कर परिवार चलाते हैं. अगर मेहनताना ही नहीं मिलेगा तो घर-परिवार कैसे चलेगा. आखिरकार सबसे बड़ी बात यह है कि इन मजदूरों का हक कहा गया. कहते हैं लाभुक 1. योजना के तहत मिली राशि से घर तो बन गया, लेकिन मजदूरी की राशि नही मिली़ हम गरीब हैं थोड़ी बहुत राशि कमाती हूं, तो घर का खर्च चलता है़ मैं मजदूरों को मजदूरी कैसे दे पाऊंगी. – समशू नेशा 2. मजदूर रोज दरवाजे पर आकर अपने मजदूरी की राशि के लिए अनाव सनाब बोलते हैं. जब हम प्रखंड कार्यालय में मजदूरी का पता लगाने गयी, तो पता चला की मजदूरी दी जा चुकी है. – सुकृति देवी 3. हमलोग गरीब है. घर तो बन गया, लेकिन मजदूरी नहीं मिली, जिससे काफी परेशानी होती है. इसका पता लगाने के लिए प्रखंड कार्यालय में गये तो पता चला कि फाइनल दिया जा चुका है, जबकि ऐसा नहीं है. – नूरजहां 4. हमलोग मजदूरी के लिए बार-बार प्रखंड कार्यालय का चक्कर काटते हैं, लेकिन वहां सिर्फ दिखाया जाता है कि फाइनल हो गया है. यानी मजदूरी चला गया है. जबकि ऐसा कुछ नहीं है, हम इसको लेकर काफी परेशान है. – एकलाग अंसारी = कहते हैं अधिकारी इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि देर हो रही है, लेकिन घबराइये नहीं जल्द ही मिलेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANCHDEV KUMAR

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PANCHDEV KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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