हड़ताल पर गये नगर पंचायत के सफाई कर्मी, शहर में लगा कूड़े का अंबार

वेतन वृद्धि व एक शिफ्ट की मांग, 16 वार्डों में सफाई व्यवस्था ठप, मांगों पर अड़े कर्मी
फोटो :-4.अपनी मांग को.लेकर हड़ताल पर गए सफाई कर्मी से पड़ा कूड़ा 3.नगर पंचायत गेट पर अपनी मांग रखते सफाई कर्मी वेतन वृद्धि व एक शिफ्ट की मांग, 16 वार्डों में सफाई व्यवस्था ठप, मांगों पर अड़े कर्मी इओ बोले- न्यूनतम मजदूरी के अनुसार हो रहा भुगतान, वार्ड पार्षद एक शिफ्ट पर असहमत मोहनिया शहर. स्थानीय नगर पंचायत के सफाई कर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये हैं. इससे शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गयी है. कर्मियों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे. मालूम हो कि नगर पंचायत क्षेत्र के 16 वार्ड हैं, जहां एनजीओ द्वारा सफाई करायी जाती है. ऐसे में सफाई कर्मी वेतन वृद्धि से लेकर कई मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गये हैं. इससे शहर के सभी वार्डों में कूड़े का अंबार लगा है. पूरे दिन सड़कों व वार्डों में गंदगी पसरी रही. हड़ताल में शामिल लोगों ने बताया कि वे नगर पंचायत में वर्ष 2011 से सफाई का कार्य कर रहे हैं, लेकिन 15 वर्ष बाद भी उनकी आर्थिक व सामाजिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. वर्तमान में कर्मियों को करीब 11 हजार मासिक वेतन मिलता है, जिसमें पीएफ कटौती के बाद मात्र 9,700 रुपये ही हाथ में आते हैं. इसे बढ़ाकर 15,500 से 16,000 रुपये किया जाना चाहिए. क्या कहते हैं सफाई कर्मी –इस संबंध में सफाई कर्मी मनोज कुमार ने बताया कि अभी उन लोगों से सुबह व शाम दोनों समय काम लिया जाता है, जिससे आने-जाने में अतिरिक्त खर्च होता है. ऐसे में वे एक शिफ्ट में काम तय करने की मांग करते हैं. साथ ही वेतन बढ़ोतरी के साथ आई कार्ड व ड्रेस भी दी जाये. — ओम प्रकाश ने बताया कि कई बार नगर प्रशासन को अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया, लेकिन आज तक कोई पहल नहीं की गयी. मांगों में मुख्य रूप से पहचान पत्र, वर्दी व वेतन बढ़ोतरी शामिल है. उन्होंने कहा जो कार्य दो शिफ्ट में कराया जा रहा है, वही कार्य एक ही शिफ्ट में कराया जाये. क्या कहते हैं इओ इस संबंध में नगर पंचायत मोहनिया के कार्यपालक पदाधिकारी सुधांशु कुमार ने बताया कि कर्मियों की मुख्य मांग दो शिफ्ट के बजाय एक शिफ्ट में काम करने की है, लेकिन इस पर वार्ड पार्षद सहमत नहीं हैं. उन्होंने बताया कि ड्रेस व आइडी कार्ड को लेकर कर्मियों ने पहले कोई औपचारिक मांग नहीं रखी थी. सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के अनुसार ही भुगतान किया जा रहा है.
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