कैमूर के रामगढ़ में सरकारी जमीन पर बढ़ता अवैध कब्जा, प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
Kaimur News: कैमूर के रामगढ़ नगर पंचायत क्षेत्र में सरकारी जमीनों पर तेजी से बढ़ते अतिक्रमण ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मुख्य सड़कों के किनारे झोपड़ियों और अवैध दुकानों का लगातार विस्तार हो रहा है, जिससे यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है. स्थानीय लोगों ने जल्द कार्रवाई की मांग की है.
Kaimur News: (रंजय जायसवाल) रामगढ़ नगर पंचायत इलाके में सरकारी जमीनों पर बढ़ते अतिक्रमण ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मुख्य सड़कों के किनारे फूस की झोपड़ियां और अस्थायी दुकानों का तेजी से विस्तार हो रहा है. लेकिन अंचल और नगर प्रशासन की ओर से समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है.
प्रशासन की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा आम हो गई है कि क्या सरकारी जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए प्रशासन को किसी आवेदन या न्यायालय के आदेश का इंतजार करना पड़ता है. लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही कार्रवाई की जाए, तो इस समस्या को आसानी से रोका जा सकता है.
एनएच-319ए किनारे बढ़ा अवैध कब्जा
यदि मुख्य सड़क एनएच-319ए की बात करें तो ग्राम भारती महाविद्यालय के मुख्य द्वार के समीप वर्ष 2019 में नाले के पीछे महज तीन-चार झोपड़ियां थीं. लेकिन पिछले छह वर्षों में इनकी संख्या बढ़कर आधा दर्जन से अधिक हो गई है. अब इन झोपड़ियों का विस्तार नाले को पार कर मुख्य सड़क तक पहुंच गया है. जिससे अन्य लोग भी सड़क किनारे अवैध दुकानें बनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं.
अन्य प्रमुख मार्गों पर भी यही स्थिति
रामगढ़-देवलिया पथ पर पावर हाउस के पास भी आधा दर्जन से अधिक परिवार सड़क किनारे झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं. वहीं रामगढ़-नुआंव मार्ग पर सूर्यपुरा पुल के पास सड़क और नहर की जमीन पर भी तेजी से अवैध निर्माण हो रहा है.
अधिकारियों की निगरानी पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि इन मार्गों से प्रतिदिन प्रशासनिक अधिकारी गुजरते हैं, इसके बावजूद अवैध निर्माणों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन निर्माणों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है.
देरी से कार्रवाई बनती है बड़ी समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही सख्ती दिखाई जाती तो अतिक्रमण को रोका जा सकता है. लेकिन वर्षों तक कार्रवाई नहीं होने से ये अवैध निर्माण स्थायी रूप ले लेते हैं, जिसके बाद इन्हें हटाने के लिए बुलडोजर जैसी कठोर कार्रवाई करनी पड़ती है. इससे प्रशासन और लोगों के बीच टकराव की स्थिति भी बनती है.
प्रशासन से उठी जिम्मेदारी निभाने की मांग
लोगों का मानना है कि सरकारी जमीन की सुरक्षा केवल शिकायतकर्ता की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रशासन की भी है. यदि अंचल और नगर पंचायत के अधिकारी नियमित निगरानी करें और समय पर कार्रवाई करें, तो इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है.
बढ़ता अतिक्रमण बन सकता है बड़ी चुनौती
छोटी झोपड़ियों से शुरू हुआ यह अतिक्रमण आने वाले दिनों में बड़ी प्रशासनिक चुनौती का रूप ले सकता है. समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है.
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