Kaimur News : माह के पहले दिन सुबह की आरती के साथ माता मुंडेश्वरी की हुई आराधना, जुटे रहे श्रद्धालु
Published by : JITENDRA KUMAR Updated At : 01 Jun 2026 6:00 AM
मां मुंडेश्वरी
Kaimur News बिहार का कैमूर जिला अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. यहाँ कई प्राचीन और प्रसिद्ध देवी-देवताओं के मंदिर हैं, जिनमें सबसे प्रमुख आदि शक्तिपीठ माता मुंडेश्वरी का मंदिर है
Kaimur News : अमित कुमार सिन्हा की रिपोर्ट : बिहार का कैमूर जिला अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. यहाँ कई प्राचीन और प्रसिद्ध देवी-देवताओं के मंदिर हैं, जिनमें सबसे प्रमुख आदि शक्तिपीठ माता मुंडेश्वरी का मंदिर है. भीषण गर्मी के मौसम को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने पूजा और आरती के समय में बदलाव किया है.
सुबह 6:00 बजे से शुरू हुआ विशेष अनुष्ठान
मंदिर के मुख्य पुजारी उमेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि जून महीने के पहले दिन यानी आज, 1 जून को सुबह 6:00 बजे मंदिर के कपाट खोले गए. इसके बाद पूरे परिसर की अच्छी तरह साफ-सफाई की गयी. ठीक 6:30 बजे शंखनाद, घंटे-घड़ियाल और महाआरती के साथ माता को विशेष भोग लगाया गया और उनकी विधि-विधान से आराधना की गयी. इस पावन अवसर पर सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और आरती के लिए उपस्थित रहे. चूंकि आज सोमवार का दिन है, इसलिए मंदिर परिसर में स्थापित प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग की भी विशेष पूजा-अर्चना और आरती की गयी.
क्या है यहाँ का मुख्य प्रसाद?
शक्तिपीठ माता मुंडेश्वरी मंदिर में ‘तांडुलम’ (विशेष चावल) को माता का मुख्य प्रसाद माना जाता है, जिसे ग्रहण करने के लिए दूर-दूर से भक्त यहाँ आते हैं.
ऋतुओं के अनुसार तय होता है आरती का समय
मुख्य पुजारी के मुताबिक, ग्रीष्म ऋतु (गर्मियों के मौसम) के दौरान मंदिर में त्रिकाल आरती का नियम है. अब से पहली आरती सुबह 6:30 बजे, दोपहर की आरती अपराह्न 11:30 बजे और शाम की महाआरती संध्या 6:30 बजे संपन्न होगी. इन तीनों ही समयों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
माता मुंडेश्वरी मंदिर धार्मिक न्यास के सचिव गोपाल जी प्रसाद ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मौसम और ऋतुओं के अनुसार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर में पूजा और आरती का समय तय किया जाता है.
पवरा पहाड़ी पर स्थित है यह अलौकिक धाम
भगवानपुर खंड के पवरा पहाड़ी पर स्थित माता मुंडेश्वरी का यह मंदिर न सिर्फ अति प्राचीन है, बल्कि देश के सबसे पुराने जीवित मंदिरों में से एक माना जाता है. इसकी महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर साल शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान यहाँ देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और मन्नत मांगने आते हैं.
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