Kaimur News : शक्तिपीठ माता मुंडेश्वरी की सुबह की महाआरती संपन्न, लगा तांडुलम का भोग

Edited by JITENDRA KUMAR
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मां मुंडेश्वरी

Kaimur News बिहार का कैमूर जिला अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. इसी पावन धरती पर स्थित है आदि शक्तिपीठ माता मुंडेश्वरी का अति प्राचीन मंदिर

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Kaimur News : अमित कुमार सिन्हा की रिपोर्ट : बिहार का कैमूर जिला अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. इसी पावन धरती पर स्थित है आदि शक्तिपीठ माता मुंडेश्वरी का अति प्राचीन मंदिर, जहां मंगलवार की सुबह एक अलौकिक नजारा देखने को मिला. सुबह-सुबह माता के विराट रूप की विशेष आराधना की गई, जिसके दर्शन और महाआरती के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ बाहरी पर्यटक भी जुटे रहे.

सुबह 6:30 बजे गूंज उठे घंटे-घड़ियाल

मंदिर के मुख्य पुजारी उमेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि मंगलवार सुबह 6:00 बजे मंदिर के कपाट खोले गए. इसके बाद पूरे गर्भगृह और परिसर की साफ-सफाई की गई. सुबह ठीक 6:30 बजे घंटे-घड़ियाल और शंखनाद के बीच माता की दिव्य आरती शुरू हुई. मां मुंडेश्वरी को उनके मुख्य और प्रिय प्रसाद ‘तांडुलम’ का भोग लगाया गया. इस दौरान पूरा मंदिर परिसर माता के जयकारों से गुंजायमान हो उठा.

पंचमुखी शिवलिंग की भी हुई विशेष पूजा

इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में स्थापित चमत्कारी पंचमुखी शिवलिंग की भी विशेष पूजा-अर्चना और आरती की गई. मान्यता है कि माता मुंडेश्वरी के दर्शन के साथ इस शिवलिंग के दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

मौसम के बदलते ही बदल जाता है आरती का समय

माता मुंडेश्वरी धार्मिक न्यास के सचिव गोपाल जी प्रसाद ने जानकारी दी कि ऋतुओं (मौसम) के अनुसार मंदिर में पूजा और आरती का समय तय किया जाता है.

आरती का नया शेड्यूल

मुख्य पुजारी के अनुसार, वर्तमान में ग्रीष्म ऋतु (गर्मी के मौसम) के कारण आरती का समय इस प्रकार रहेगा:

सुबह की आरती: 06.30 बजे

दोपहर की आरती: 11.30 बजे

संध्या आरती: 06.30 बजे

इन तीनों समयों पर माता की विशेष आराधना होती है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.

पवरा पहाड़ी पर स्थित है यह प्राचीन धाम

भगवानपुर की खूबसूरत पवरा पहाड़ी पर स्थित माता मुंडेश्वरी का यह मंदिर न केवल अति प्राचीन है, बल्कि देश के सबसे पुराने जीवित मंदिरों में से एक माना जाता है. हर साल शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान यहां देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के चरणों में शीश नवाने आते हैं.

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