कैमूर में लाइट योजना व्यवस्था को लेकर विवाद, सीनियर अधिकारियों के कार्यों की जांच अब करेंगे जूनियर अधिकारी

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Kaimur News: कैमूर के भभुआ में जिला परिषद द्वारा लगाई गई हाईमास्ट लाइटों की जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. सीनियर अधिकारियों द्वारा कराए गए कार्यों की जांच जूनियर अधिकारियों से कराए जाने पर पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है. मामले में 29 हाईमास्ट लाइटों के अधिष्ठापन और उनके सत्यापन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

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Kaimur News: भभुआ में जिला परिषद की ओर से विभिन्न स्थानों पर लगाई गई हाईमास्ट लाइटों की जांच को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं. जानकारी के अनुसार कुल 29 हाईमास्ट लाइटें विभिन्न क्षेत्रों में लगाई गई हैं, जिनमें से एक बड़े हिस्से की स्थापना एक ही क्षेत्र में बताई जा रही है. स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा चर्चा में है कि जब सीनियर अधिकारियों की देखरेख में कार्य संपन्न कराए जाते हैं, तो उनकी जांच जूनियर स्तर के पदाधिकारियों से कराए जाने की प्रक्रिया कितनी उचित है.

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29 में से 22 हाईमास्ट लाइटों को लेकर विशेष चर्चा

मामले में यह भी सामने आया है कि 29 में से करीब 22 हाईमास्ट लाइटें एक ही नगर-क्षेत्र में लगाई गई हैं, जिसे लेकर प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्य वितरण पर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में एक ही क्षेत्र में लाइटें लगाए जाने की आवश्यकता और उसके चयन मानकों की समीक्षा होनी चाहिए.

जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल जांच प्रक्रिया को लेकर है. आरोप है कि सीनियर अधिकारियों द्वारा स्वीकृत और कराए गए कार्यों की जांच जूनियर अधिकारियों के माध्यम से कराई जा रही है, जिससे निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न हो रहा है. लोगों का कहना है कि ऐसी स्थिति में जांच की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है.

पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग

स्थानीय स्तर पर मांग की जा रही है कि हाईमास्ट लाइटों के अधिष्ठापन से जुड़े पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए. साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और तकनीकी आधार पर हो. जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है, ताकि सार्वजनिक संसाधनों का सही उपयोग हो सके.

हाईमास्ट लाइटों के अधिष्ठापन और उनकी जांच प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है. अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या स्पष्टता और कार्रवाई करता है.

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