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जीवित्पुत्रिका व्रत का तीन दिवसीय अनुष्ठान आज नहाय- खाय से होगा शुरू

Updated at : 12 Sep 2025 4:27 PM (IST)
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जीवित्पुत्रिका व्रत का तीन दिवसीय अनुष्ठान आज नहाय- खाय से होगा शुरू

KAIMUR NEWS.शनिवार से जीवित्पुत्रिका व्रत का तीन दिवसीय कठिन अनुष्ठान शुरू हो रहा है. जिले सहित ग्रामीण क्षेत्रों में रविवार को पुत्र की दीर्घायु के लिए माताएं जीवित्पुत्रिका के पर्व पर 24 घंटे का निर्जला व्रत रखेंगी.

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संतानों की लंबी आयु के लिए रविवार को माताएं रखेंगी निर्जल उपवास

नहाय – खाय के दिन नोनी का साग व सत्पुतिया करेंगी ग्रहण

प्रतिनिधि, भभुआ सदर

शनिवार से जीवित्पुत्रिका व्रत का तीन दिवसीय कठिन अनुष्ठान शुरू हो रहा है. जिले सहित ग्रामीण क्षेत्रों में रविवार को पुत्र की दीर्घायु के लिए माताएं जीवित्पुत्रिका के पर्व पर 24 घंटे का निर्जला व्रत रखेंगी. दरअसल जीवित्पुत्रिका या जिउतिया पर्व हिंदू धर्म में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाये जाने वाले पर्वों में से एक है. इस दिन व्रत का खास महत्व होता है, जिसे अपनी संतान की मंगलकामना और लंबी आयु के लिए रखा जाता है. पंडित उपेंद्र तिवारी व्यास ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी से नवमी तिथि तक मनाया जाता है. इस बार यह 14 सितंबर रविवार को मनाया जायेगा. जबकि पारण के साथ इसका समापन 15 सितंबर सोमवार को होगा. पंडित उपेंद्र तिवारी व्यास के अनुसार,जीवित्पुत्रिका व्रत अष्टमी तिथि में की जाती और इसका पारण नवमी तिथि में करना शास्त्र सम्मत माना जाता है. इस बार पंचांग के अनुसार, अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 14 सितंबर रविवार को सुबह 8:51 बजे आरंभ होकर 15 सितंबर सोमवार को सुबह 5:36 बजे समाप्त होगी. रविवार को सूर्योदय से पहले महिलाएं ओठगन करेंगी और सोमवार को प्रात: 6:27 बजे के बाद व्रत का पारण होगा.

छठ पर्व की तरह होते है सारे कर्मकांडदरअसल जीवित्पुत्रिका व्रत भी छठ महापर्व की तरह ही तीन दिनों तक चलता है, जिसमें पहले दिन नहाय- खाय, दूसरे दिन निर्जला व्रत और तीसरे दिन व्रत का पारण होता है. जिउतिया अर्थात जीवित्पुत्रिका व्रत का भी विशेष महत्व है. जीवितपुत्रिका व्रत माताएं अपनी संतान की सुरक्षा, स्वस्थ, सुखी व दीर्घायु होने के लिए करती रही हैं. इस दौरान माताएं व्रत रख कर जलाशय व नदियों में जाकर स्नानादि कर कुश के जीमूतवाहन के प्रतीक पर जल अर्पण कर पूजा-अर्चना करती हैं. इसके बाद शाम को माताएं कथा सुनती हैं. शुक्रवार की सुबह में माताएं निर्जला उपवास खत्म करेंगी.

बाजार में बढ़ी चहल- पहल , फलों के दाम रहे आसमान पर

भभुआ सदर.

जिउतिया पर्व को लेकर बाजार में शुक्रवार को काफी गहमागहमी रही. खास कर महिलाओं की भीड़ अधिक देखी गयी. जिउतिया में फलों का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा रही है. इसको लेकर फलों का बाजार भी गर्म रहा. फलों में खास कर केला व खीरा की बिक्री सबसे अधिक हुई. सेब, मौसमी, अमरूद जैसे फलों की भी बिक्री हुई. पर्व को लेकर बाजार में 40 रुपये दर्जन मिलने वाला केला 60 से 80 रुपये दर्जन मिल रहा था. 30 रुपये किलो मिलने वाला खीरा 50-60 रुपये किलो तक बिका. सत्पुतिया तो 30 रुपये किलो की जगह 80 रुपये किलो बिकने लगा है. सेब भी 80 रुपये से बढ़ कर 100-120 रुपये किलो तक पहुंच गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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