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सर्वर डाउन, सिस्टम फेल : कड़ाके की ठंड में सरकारी कागज बनवाना बना संघर्ष

Updated at : 03 Jan 2026 5:20 PM (IST)
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सर्वर डाउन, सिस्टम फेल : कड़ाके की ठंड में सरकारी कागज बनवाना बना संघर्ष

सुबह पांच बजे से कतार में खड़े बुजुर्ग, फिर भी नहीं हो पा रहा केवाइसी व आधार अपडेट

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सुबह पांच बजे से कतार में खड़े बुजुर्ग, फिर भी नहीं हो पा रहा केवाइसी व आधार अपडेट तकनीकी खामी का खामियाजा जनता को, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल भभुआ शहर. सरकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने के दावे चाहे जितने भी किये जायें, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. इन दिनों सरकारी दस्तावेज बनवाने व आधार अपडेट कराने के लिए कड़ाके की ठंड में भी ग्रामीणों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है. सीएससी संचालकों के अनुसार, लिंक व सर्वर फेल होने की वजह से कामकाज प्रभावित है, लेकिन इस तकनीकी खामी का सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता, खासतौर पर बुजुर्गों व महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है. जिले में शीतलहर व कड़ाके की ठंड जारी रहने से वृद्धा पेंशन पाने वाले बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है. पेंशन के लिए केवाइसी व आधार आधारित सत्यापन अनिवार्य है, जिसमें अंगूठा लगाना जरूरी होता है. कभी बायोमेट्रिक मशीन काम नहीं करती, तो कभी सर्वर डाउन हो जाता है. कई बुजुर्ग ऐसे हैं जो पिछले कई दिनों से केवल अंगूठा लगवाने के लिए केंद्रों का चक्कर काट रहे हैं. घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी उनका नंबर नहीं आता. अगर किसी दिन नंबर आ भी जाये, तो कभी तकनीकी समस्या तो कभी अंगूठा नहीं लेने के कारण काम नहीं हो पाता. शहर स्थित कॉमन सर्विस सेंटर व आधार केंद्रों पर हालात यह हैं कि कड़ाके की ठंड के बावजूद लोग सुबह पांच बजे से ही लाइन में लगने को मजबूर हैं. बुजुर्ग महिलाएं व पुरुष एक ही कतार में घंटों खड़े दिखायी देते हैं. इसके बावजूद दिनभर इंतजार के बाद भी कई लोगों का काम नहीं हो पाता. ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें बताया जाता है कि आज सर्वर डाउन है या लिंक काम नहीं कर रहा. कई बार घंटों इंतजार के बाद जब नंबर आता है तो आधार में किसी न किसी तरह की गड़बड़ी निकल आती है. ऐसे में उन्हें आधार अपडेट कराने के लिए दूसरे केंद्र भेज दिया जाता है, जहां पहले से ही लंबी कतार लगी होती है. प्रखंड कार्यालयों में भी हालात जस के तस लोगों को उम्मीद रहती है कि प्रखंड कार्यालय में शायद उनका काम हो जायेगा, लेकिन वहां भी स्थिति अलग नहीं है. कर्मचारी साफ तौर पर कह देते हैं कि सर्वर डाउन है और अभी कुछ नहीं हो पायेगा. इससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि उन्हें आने-जाने में समय व पैसे दोनों खर्च करने पड़ते हैं. आधार अपडेट एक अलग संघर्ष आधार में नाम, जन्मतिथि या बायोमेट्रिक अपडेट कराना भी किसी चुनौती से कम नहीं है. आधार केंद्रों की संख्या कम होने के कारण भीड़ अत्यधिक है. ग्रामीणों का आरोप है कि एक दिन में सीमित लोगों का ही काम हो पाता है, जबकि बाकी लोगों को अगले दिन आने के लिए कह दिया जाता है. छात्रों को भी आधार अपडेट नहीं होने के कारण छात्रवृत्ति, परीक्षा फॉर्म व अन्य सुविधाओं में दिक्कत आ रही है. अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है. ठंड में लाचार बुजुर्ग, व्यवस्था पर सवाल कड़ाके की ठंड में 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घंटों लाइन में खड़े रहना चिंताजनक है. न तो बैठने की समुचित व्यवस्था है और न ही ठंड से बचाव के लिए कोई इंतजाम. कई बार लोग बीमार पड़ जाते हैं, फिर भी मजबूरी में उन्हें आना पड़ता है. क्या कहते हैं प्रखंड विकास पदाधिकारी इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि तकनीकी कारणों से लिंक फेल व सर्वर डाउन की समस्या सामने आ रही थी. उच्च स्तर पर प्रयास किये गये हैं और अब इस समस्या से काफी हद तक निजात पा ली गयी है. उन्होंने बताया कि जिन वृद्धा पेंशनधारकों को नियमित पेंशन मिल रही है, उन्हें केवाइसी कराने की आवश्यकता नहीं है. जिनका नया आवेदन हुआ है या जिनकी पेंशन रुकी हुई है, वे केवाइसी करा लें. अब सर्वर की स्थिति सामान्य हो गयी है. जिनका अंगूठा सिस्टम में नहीं लिया जा रहा है, वे प्रखंड कार्यालय आकर आवेदन दे सकते हैं. ———– क्या कहते हैं लोग –लक्ष्मीना देवी, उम्र 82 वर्ष का कहना है कि ठंड इतनी है कि हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं. पेंशन नहीं आ रहा है. पता चला कि आधार अपडेट करना है. आठ बजे से आये है, पता नहीं आज होगा भी की नहीं. –अयाज खान नौघरा निवासी चैनपुर ने कहा केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि प्रशासन भी सुस्त है. पांच बजे सुबह उठकर घर से निकले है. छह बजे भभुआ आये हैं इतनी ठंड में. आधार अपडेट करने वाले केंद्रों की संख्या बढ़ायी जाती, तो आम लोगों को इतनी परेशानी नहीं होती. –उरगनी देवी का कहना है कि सुबह अंधेरे में घर से निकले हैं. ठंड में कांपते हुए लाइन में खड़े हैं. बच्चों का आधार अपडेट कराना है. अपनी पांच साल की बेटी का आधार बनवाना है, पता नहीं होगा भी की नहीं. –मोहर सिंह, उम्र 80 वर्ष का कहना है कि पहाड़िया से पैदल निकले है. छह-सात बजे पहुंचे हैं. पेंशन बंद है. आधार अपडेट करना है. ठंड लगत बा, लेकिन न आग जलत बा, न ही अभी सेंटर खुला है. पता नहीं होगा भी कि नहीं. –छात्रा पायल पटेल का कहना है कि हमलोग अपना कोचिंग छोड़कर आठ बजे से आये हैं. आधार अपडेट करवाने अभी इतना भीड़ है कि पता करने पर पता चला है आधार बनाने वाले 10:30 बजे आयेंगे, नंबर लग रहा है. प्रशासन आधार सेंटर की संख्या बढ़ा देती, तो इतनी भीड़ नहीं होती.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH KUMAR

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