मोहनिया में डीएपी खाद की किल्लत, 600 बोरी आते ही खत्म; महंगे दाम पर खरीदने को मजबूर किसान

विस्कोमान केंद्र पर खाद का होता वितरण
मोहनिया में डीएपी खाद की कमी से किसान बेहाल हैं। सरकारी केंद्रों पर खाद खत्म होने से किसान निजी दुकानों से महंगे दाम पर खाद खरीदने को मजबूर हैं।
Mohania DAP Fertilizer Shortage : कैमूर जिले के मोहनिया शहर में खरीफ फसल के अहम सीजन के बीच डीएपी खाद की किल्लत ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. हालात ऐसे हैं कि किसान बिस्कोमान केंद्र से लेकर निजी दुकानों तक खाद के लिए भटक रहे हैं. सरकारी केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिलने से किसानों को मजबूरी में महंगे दाम पर बाजार से डीएपी खरीदना पड़ रहा है. इस बीच सोमवार को बिस्कोमान केंद्र पर आई 600 बोरी खाद कुछ ही घंटों में खत्म हो गई, जिससे सैकड़ों किसान खाली हाथ लौट गए.
इन दिनों किसान धान की रोपाई में पूरी तरह जुटे हुए हैं. बारिश की कमी के कारण वे मोटर पंप के सहारे खेतों में पानी पहुंचाकर किसी तरह रोपाई कर रहे हैं. ऐसे समय में फसल की बेहतर बढ़वार के लिए डीएपी खाद बेहद जरूरी होती है, लेकिन इसकी कमी ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है.
लंबी कतार, कुछ ही घंटों में खत्म हो गई खाद
सोमवार को जैसे ही बिस्कोमान केंद्र पर 600 बोरी डीएपी पहुंचने की सूचना मिली, सुबह से ही किसानों की लंबी कतार लग गई. हर कोई अपनी बारी का इंतजार कर रहा था, लेकिन वितरण शुरू होने के कुछ ही घंटों में पूरा स्टॉक खत्म हो गया. इसके बाद भी बड़ी संख्या में किसान लाइन में लगे रह गए और उन्हें बिना खाद लिए ही वापस लौटना पड़ा.
स्थिति को देखते हुए मंगलवार को फिर से खाद मंगवाई गई और वितरण किया गया, लेकिन दूसरे दिन भी यही हाल रहा. पुलिस की मौजूदगी में वितरण कराया गया, फिर भी कई किसानों को खाद नहीं मिल पाई.
Kaimur News : खाद खत्म होते ही भड़के किसान
सोमवार को खाद खत्म होने की खबर मिलते ही किसानों का गुस्सा फूट पड़ा. नाराज किसानों ने बिस्कोमान केंद्र पर जमकर हंगामा किया और पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग की. हालात तनावपूर्ण होते देख केंद्र कर्मियों ने पुलिस को बुलाया. मौके पर पहुंची पुलिस ने किसानों को समझाकर शांत कराया.
प्रबंधन की ओर से बचे हुए किसानों के नाम पर्ची पर दर्ज किए गए, ताकि अगली खेप आने पर उन्हें प्राथमिकता दी जा सके. मंगलवार को उन्हीं पर्चियों के आधार पर करीब 170 किसानों के बीच खाद का वितरण किया गया.
हर साल दोहराई जाती है समस्या
किसानों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है. हर साल धान और गेहूं के सीजन में डीएपी और यूरिया की किल्लत सामने आती है. इसके बावजूद प्रशासन और विभाग स्तर पर स्थायी समाधान नहीं किया जाता. इस बार तो पहले ही बारिश कम है और सिंचाई की परेशानी अलग, ऐसे में खाद की कमी ने किसानों की मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं.
क्या कहते हैं किसान
किसान बबलू कुमार ने बताया कि धान की रोपाई के समय डीएपी खाद की बेहद जरूरत होती है. बारिश की अनिश्चितता और सिंचाई संकट से किसान पहले ही परेशान हैं, अब खाद की कमी ने हालात और खराब कर दिए हैं.
वहीं किसान शिव नारायण का कहना है कि सरकारी केंद्रों पर खाद नहीं मिलने से निजी बाजार में 2000 से 2200 रुपये तक में डीएपी बेची जा रही है. मजबूरी में किसानों को ऊंचे दाम पर खाद खरीदनी पड़ रही है. उन्होंने प्रशासन से जल्द पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की.
क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में बिस्कोमान के क्षेत्रीय प्रबंधक चंदन कुमार ने बताया कि सोमवार को आई 600 बोरी डीएपी खाद वितरण के दौरान खत्म हो गई थी. किसानों की परेशानी को देखते हुए मंगलवार को फिर से खाद मंगवाकर वितरण कराया गया. उन्होंने कहा कि आगे भी मांग के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है.
बक्सर से मंगवाई गई अतिरिक्त खेप
किसानों के हंगामे और बढ़ती मांग को देखते हुए मंगलवार को बक्सर से अतिरिक्त 600 बोरी डीएपी खाद मंगवाई गई. इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसान खाद से वंचित रह गए. बघिनी निवासी किसान विनोद सिंह ने बताया कि बाजार में खाद आसानी से मिल रही है, लेकिन ऊंचे दाम पर, जबकि सरकारी केंद्र पर पर्याप्त उपलब्धता नहीं है.
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