दुर्गावती नदी पर बने पुल में जगह-जगह दरार, धंस रहा सड़क का हिस्सा; कभी भी बंद हो सकता है कैमूर-रोहतास का संपर्क
पूल के प्लांट में पड़ा दरार | Prabhat Khabar Network
Kaimur News : कैमूर और रोहतास को जोड़ने वाले दुर्गावती नदी पुल के पथ में दरारें पड़ गई हैं. जर्जर पुल से आवागमन खतरे में है, प्रशासन से मरम्मत की मांग की जा रही है.
Kaimur News : रामपुर प्रखंड क्षेत्र के सबार गांव के पास दुर्गावती नदी पर बना पुल इन दिनों बदहाली की मार झेल रहा है. कैमूर को रोहतास से जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण पुल के पथ में जगह-जगह दरारें पड़ गयी हैं और कई हिस्से धंसने लगे हैं. पुल की सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गये हैं, जबकि कई स्थानों पर गिट्टी उखड़ने के साथ सरिया भी दिखाई देने लगा है. समय रहते इसकी मरम्मत नहीं करायी गयी तो कभी भी आवागमन बाधित होने की आशंका है.
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बारिश में पुल पर बन जाता है झील जैसा नजारा
बरसात के मौसम में पुल की स्थिति और खराब हो गयी है. पुल की सड़क पर जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पानी जमा हो जाता है और झील जैसा नजारा बन जाता है. सड़क पर बनी दरारों और गड्ढों में भी पानी भर गया है. इससे पुल के पथ के अंदर पानी रिसने और सड़क के हिस्से के लगातार कमजोर होने की आशंका बनी हुई है.
जगह-जगह दिख रहा सरिया, बढ़ा खतरा
पुल के ऊपरी हिस्से में कई जगह सड़क क्षतिग्रस्त हो चुकी है. गिट्टी उखड़ने के कारण पुल के पथ में लगी सरिया बाहर निकल आयी है. ऐसे में पुल से गुजरने वाले छोटे-बड़े वाहनों के लिए खतरा बढ़ गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए तत्काल मरम्मत की जरूरत है.
1966 के अकाल के बाद हुआ था पुल का निर्माण
जानकार सूत्रों के अनुसार, दुर्गावती नदी पर इस पुल का निर्माण सोन उच्चस्तरीय नहर सिंचाई विभाग द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से 1966 के अकाल के बाद कराया गया था. निर्माण पूरा होने के बाद वर्ष 1971 में पुल का उद्घाटन किया गया था. पुल के नीचे दुर्गावती नदी की धारा बहती है, जो सामान्यत: सूखती नहीं है. पुल के बीच से सोन उच्चस्तरीय नहर की धारा अपने गंतव्य की ओर जाती है.
सिंचाई व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है पुल
पुल में तीन फॉल बनाये गये हैं. सोन उच्चस्तरीय नहर में औसत से अधिक पानी होने पर सिंचाई विभाग द्वारा उसे इन फॉल के माध्यम से दुर्गावती नदी में गिराया जाता है. इसके बाद पानी नदी के रास्ते रामगढ़ क्षेत्र की ओर जाता है, जिससे वहां भी सिंचाई में मदद मिलती है. इस वजह से पुल केवल आवागमन ही नहीं, बल्कि सिंचाई व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है.
पांच दशक से दो जिलों को जोड़ रहा पुल
प्रखंड मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर सबार के पास बने इस पुल से रोहतास जिले के चेनारी तक पहुंचना आसान होता है. करीब पांच दशक पहले सिंचाई विभाग द्वारा बनाये गये इस पुल ने कैमूर और रोहतास जिले को सीधे जोड़ दिया. इससे दोनों जिलों के बीच दूरी कम हुई और लोगों को आवागमन में काफी सुविधा मिली. वर्तमान में प्रतिदिन हजारों लोग इस पुल का इस्तेमाल करते हैं.
अब भारी वाहनों की आवाजाही से बढ़ रहा दबाव
जानकारों के अनुसार, पुल का निर्माण मूल रूप से सिंचाई विभाग के वाहनों की आवाजाही के लिए किया गया था. बाद में इस पर सभी प्रकार के वाहनों का परिचालन शुरू हो गया. शुरुआती वर्षों में पुल से मुख्य रूप से छोटे वाहन ही गुजरते थे, लेकिन अब बड़े और भारी वाहन भी लगातार आवाजाही कर रहे हैं. भारी वाहनों के दबाव के कारण पुल की सड़क की स्थिति लगातार खराब होने की बात कही जा रही है.
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आठ प्वाइंट में पांच-छह जगह पड़ी दरार
पुल से गुजरने वाले यात्रियों और राहगीरों के अनुसार, पुल पर कुल आठ प्वाइंट हैं, जिनमें पांच से छह जगहों पर दरारें पड़ गयी हैं. लगातार बड़े वाहनों के परिचालन के कारण ये दरारें बढ़ती जा रही हैं. बारिश के दौरान पानी भरने से स्थिति और गंभीर हो जाती है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं करायी गयी तो पुल की हालत और बिगड़ सकती है और इसके बाद आवागमन बंद होने की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है.

पांच साल पहले लाखों की लागत से हुई थी पीसीसी ढलाई
सबार गांव के ग्रामीण नन्हू मल्लाह सहित अन्य लोगों ने बताया कि करीब पांच वर्ष पहले पुल के पथ में दरार पड़ने और सड़क क्षतिग्रस्त होने के बाद इसकी मरम्मत करायी गयी थी. उस समय लाखों रुपये की लागत से पुल के पथ पर नीचे सरिया डालकर पीसीसी ढलाई करायी गयी थी. ग्रामीणों के अनुसार, मरम्मत के करीब छह महीने बाद ही सड़क में दोबारा दरारें पड़ने लगीं.
मरम्मत की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने उठाये सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि पीसीसी ढलाई के दौरान निर्माण कार्य में अनियमितता बरती गयी थी. संवेदक द्वारा निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार सामग्री का इस्तेमाल नहीं किये जाने की शिकायत उस समय भी की गयी थी. ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित विभाग के पदाधिकारियों ने शिकायत पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया. अब स्थिति यह है कि कई स्थानों पर पीसीसी धंस गयी है और उसके नीचे की सरिया दिखाई देने लगी है.
चेनारी बाजार और इलाज के लिए भी इसी मार्ग पर निर्भरता
इस पुल से होकर लोग चेनारी, शिवसागर, कुदरा, रामपुर, भभुआ सहित अन्य प्रखंडों में आते-जाते हैं. सबार क्षेत्र के किसान अपनी उपज और अनाज बेचने के लिए चेनारी बाजार भी जाते हैं. दूरी कम होने के कारण क्षेत्र के कई लोग इलाज के लिए भी चेनारी जाना पसंद करते हैं. ऐसे में पुल की खराब स्थिति से बड़ी आबादी के प्रभावित होने की आशंका है.
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समय रहते मरम्मत कराने की मांग
ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग और पथ निर्माण विभाग से पुल के पथ का जल्द निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि कैमूर और रोहतास दोनों जिलों के लिए यह पुल बेहद महत्वपूर्ण है. समय रहते इसकी मरम्मत नहीं हुई तो न केवल दुर्घटना का खतरा बढ़ेगा, बल्कि दोनों जिलों के बीच आवागमन भी प्रभावित हो सकता है.
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