स्वच्छता अभियान फेल: शौचालयों में लकड़ियां, खुले में शौच जा रहे लोग

प्रखंड की बघिनी पंचायत के वार्ड 13 में स्थित अधवार मुसहर बस्ती में स्वच्छता अभियान के दावे खोखले साबित हो रहे हैं.
अधवार मुसहर बस्ती में अधिकतर शौचालयों में दरवाजे तक नहीं लाखों खर्च के बाद भी 150 घरों की बस्ती में सड़कों पर पसरी है गंदगी मोहनिया सदर. प्रखंड की बघिनी पंचायत के वार्ड 13 में स्थित अधवार मुसहर बस्ती में स्वच्छता अभियान के दावे खोखले साबित हो रहे हैं. दुर्गावती मुख्य नहर के दक्षिण स्थित इस बस्ती में अधिकतर शौचालयों में दरवाजे तक नहीं हैं. स्थिति यह है कि यहां के लोग शौचालयों का उपयोग शौच के लिए नहीं, बल्कि लकड़ियां व अन्य सामान रखने के लिए कर रहे हैं. प्रशासन द्वारा व्यवहार परिवर्तन के लिए चलाये गये बड़े अभियानों का इस बस्ती के लोगों पर कोई खास प्रभाव पड़ता नजर नहीं आ रहा है. करीब 150 घरों की आबादी वाली इस बस्ती के अधिकतर लोग आज भी खुले में ही शौच कर रहे हैं. सबसे दुखद बात यह है कि पंचायत में स्वच्छता की निगरानी व व्यवहार परिवर्तन की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर दी गयी है, आज वह निगरानी समिति भी गुम हो गयी है. स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए जिम्मेदार लोग ही आज अपने कर्तव्यों से विमुख होते जा रहे हैं. धरातल पर सच्चाई यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जिन्हें निगरानी की जिम्मेदारी दी गयी है, वे स्वयं व उनके परिजन भी खुले में शौच करने से तनिक परहेज नहीं कर रहे हैं. वर्ष 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ नवल किशोर चौधरी ने इस दलित बस्ती में पहुंचकर लोगों से स्वच्छता की अपील की थी. उस समय ग्रामीणों ने अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा भी लिया था, लेकिन समय बीतने के साथ लोग स्वच्छता से दूर होते चले गये. आज स्थिति यह है कि शौचालय दरवाजा विहीन हैं व लोग उनमें लकड़ियां रख रहे हैं. सरकार जहां स्वच्छता के नाम पर लाखों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं धरातल पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा. ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों व रास्तों पर आज भी शौच की गंदगी पसरी रहती है, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है.
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