Kaimur News : चयन से लेकर किस्त भुगतान तक आवास योजना में पैसे की मार झेल रहे लाभुक

जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में लाभुकों के चयन से लेकर किस्त भुगतान तक की गाज लाभुकों पर गिर रही है. कहीं पक्के मकान वालों को आवास योजना पाने के योग्य लाभुकों की सूची में शामिल कर लिया जाता है, तो कहीं लाभुकों के सर्वे में खुलेआम पैसे की वसूली की जाती है.
भभुआ. जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में लाभुकों के चयन से लेकर किस्त भुगतान तक की गाज लाभुकों पर गिर रही है. कहीं पक्के मकान वालों को आवास योजना पाने के योग्य लाभुकों की सूची में शामिल कर लिया जाता है, तो कहीं लाभुकों के सर्वे में खुलेआम पैसे की वसूली की जाती है. अभी जिले का ताजा मामला चैनपुर प्रखंड की जगरीया पंचायत में आवास सहायक द्वारा छुटे हुए लाभुकों के सर्वे में घूस की रकम ऐंठने के मामले का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें जिला प्रशासन स्तर से जांच पड़ताल करने के बाद मामले को जब सत्य पाया गया तो जगरियां पंचायत की आवास सहायिका ग्रामीण कुमारी सीमा पटेल की सेवा अवैध राशि वसूलने को लेकर तत्काल समाप्त कर दिया गया. इसी तरह दूसरा मामला भी चैनपुर प्रखंड के ही अमांव पंचायत के ग्राम तिवई का है. यहां ग्रामीण आवास सहायक विजय कुमार द्वारा पक्का आवास को कच्चा दर्शाकर लाभुक को आवास योजना के पात्रता को ले चल रहे सर्वेक्षण में आवास योजना का उसे पात्र लाभुक बना देते हैं. अब यह कारनामा किस लाभ के चक्कर में किया गया या नहीं यह तो आवास सहायक ही बता सकते हैं. फिलहाल विजय कुमार से प्रशासन ने स्पष्टीकरण पूछा है. इधर, इस मामले का खुलासा तब हुआ जब डीआरडीए निदेशक प्रीतम कुमार द्वारा फरवरी माह में प्रधानमंत्री आवास योजना का जिले में चल रहे सर्वेक्षण का जांच चैनपुर प्रखंड की पंचायत अमांव में की गयी थी. डीआरडीए निदेशक द्वारा जब निरीक्षण के क्रम में पंचायत के तिवई गांव के सनपतिया देवी पति रामकिशन राम के घर की जांच की गयी, तो पाया गया कि सनपतिया देवी का घर बाहर से कच्चा तथा अंदर से पक्का बना हुआ है, जिसके बाद अब डीआरडीए निदेशक द्वारा अमांव पंचायत के ग्रामीण आवास सहायक विजय कुमार को स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर कहा गया है कि आपके द्वारा सर्वेक्षण का काम ठीक ढंग से नहीं किया जा रहा है तथा जानबूझ कर पक्के आवास वाले अयोग्य लाभुक को भी आवास योजना का लाभ देने की मंशा से आवास योजना की सूची में शामिल किया जा रहा है. अत: उक्त संबंध में स्थिति स्पष्ट करें कि आपके द्वारा किस मंशा से पक्के आवास वाले लाभुक का नाम आवास पाने वाले सर्वेक्षण में शामिल किया गया है, अन्यथा की स्थिति में विभागीय नियमों की अनदेखी करने के कारण आपके विरुद्ध विभागीय नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी. यह तो चंद उदाहरण है जो पर्दे के बाहर हैं. पर्दे के अंदर आवास योजना के काजल कोठरी में घुसने वालों को कितने दाग लगते हैं, बस इसका अंदाजा ही लगाया जा सकता है. इन्सेट आम हो चुकी है आवास योजना में राशि मांगने की शिकायत भभुआ. आवास योजना में राशि वसूलने की शिकायत आम होती जा रही है. ऐसी शिकायतें प्रशासन के पास भी पहुंच जाती है. कुछ मामलों में लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के यहां भी परिवाद दायर करा दिया जाता है. उदाहरण के लिए पूर्व में भगवानपुर प्रखंड के बहुरी गांव की महिला लाभुक ममता देवी पति नागेंद्र राम ने अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के यहां परिवाद दायर कर आवास सहायक पर 20 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया था और कहा था कि मेरा नाम आवास योजना में शामिल होने के बावजूद आम सभा में जिन लोगों ने पैसा दिया था उनका नाम बोला गया और मेरा नाम नहीं पुकारा गया. जबकि, पक्के मकान वालों का नाम सूची में शामिल किया गया है. यही नहीं जनप्रतिनिधियों द्वारा भी योजना में राशि वसूलने का आरोप लगाया जाता है. रामपुर प्रखंड के प्रमुख घूरा यादव ने तो आवास योजना में 10 से 20 हजार घूस मांगे जाने को लेकर प्रखंड के आवास योजना कार्यालय में ताला बंद कर दिया था. यही नहीं भभुआ प्रखंड के मुखिया संघ ने भी पूर्व में प्रशासन को आवेदन देकर विभिन्न पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में आवास सहायकों द्वारा लाभुकों से पैसे की उगाही किये जाने का आरोप लगाया था और कहा था कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में आवास सहायकों के पैसा वसूली से ग्रामीण त्रस्त हैं. सात मार्च को ही पैसा वसूलने के आरोप में ग्रामीणों द्वारा भभुआ प्रखंड की महुअत पंचायत के दुबौली गांव में आवास सहायक को बंधक बनाने का वीडियो वायरल हुआ था. इन्सेट 2 योजना का लाभ नहीं मिलने पर सरकार तक पहुंच जाते हैं लाभुक भभुआ. जिले में चल रहे प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का उद्देश्य जहां एक तरफ गरीब और अपना घर बनाने में असमर्थ परिवारों को घर बसाना है. लेकिन, कई कारिंदे इन गरीब और असमर्थ परिवारों से भी राशि वसूलने का खेल खेलते हैं. नतीजा है कि कई गरीब लाभुकों के राशि नहीं देने के कारण आवास योजना का लाभ भी नहीं मिल पाता है. इसके बाद जिले के करिंदों से निराश होकर ऐसे लाभुक जिनके पास जमा-पूंजी के नाम पर फूटी कौड़ी तक नहीं होती है तो सरकार तक पहुंच जाते हैं. पिछले साल ही सरकार के संज्ञान लेने पर इस तरह का मामला सामने आया था. इसमें रामगढ़ प्रखंड के देवहलियां गांव की विकलांग लाभुक सीमा देवी पति राजकुमार राम ने मुख्यमंत्री के जनता दरबार में आवेदन देकर आवास योजना की दूसरी किस्त पिछले 10 वर्षों से नहीं दिये जाने की शिकायत दर्ज करायी थी. उसका कहना था कि दूसरी किस्त की राशि को लेकर मैं कई बार प्रखंड का चक्कर लगा चूकी हूं. जबकि यह मात्र कुछ उदाहरण हैं, ऐसी कई शिकायतें सरकार से लेकर मंत्रियों तक पहुंचती रहती हैं.
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By Prabhat Khabar News Desk
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