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अतिक्रमण की चपेट में बजरकोना गांव का तालाब

Updated at : 16 Dec 2025 3:44 PM (IST)
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अतिक्रमण की चपेट में बजरकोना गांव का तालाब

अवैध कब्जे से तालाब के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा

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अवैध कब्जे से तालाब के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा जांच के बाद होगी नियम संगत कार्रवाई : सीओ कुदरा. प्रखंड क्षेत्र की नेवरास पंचायत अंतर्गत बजरकोना गांव का मुख्य जलस्रोत तालाब इन दिनों अतिक्रमण की चपेट में है. ग्रामीणों द्वारा तालाब की भराई कर उसके पिंड पर घर, मड़ई व अन्य निर्माण करा लिये गये हैं, जिससे सरकारी तालाब के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि आज की नयी पीढ़ी पूर्वजों द्वारा जनहित में खुदवाये गये तालाब का अस्तित्व मिटाने पर उतारू है. तालाब की पिंड पर अवैध कब्जा जमा कई जगहों पर मड़ई व पक्का मकान बना लिये गये हैं. साथ ही अतिक्रमणकारी धीरे-धीरे तालाब को मिट्टी व कूड़े-कचरे से भरना शुरू कर दिये हैं. अतिक्रमण की यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में तालाब का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा. प्रशासनिक शिथिलता के कारण स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है. सरकार के आदेश के बाद भी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया काफी धीमी है. बताया गया कि इस तालाब का रकबा करीब डेढ़ एकड़ है, जो गांव से सटे पश्चिम दिशा में स्थित है. गांव के लोग कई वर्षों से यहां छठ पूजा धूमधाम से करते आ रहे थे, लेकिन तालाब की घटती सुंदरता के कारण छठ व्रतियों की संख्या कम होने लगी है. इसके चलते गांव के आधे लोग छठ पूजा दूसरे स्थानों पर जाकर करने को मजबूर हैं. ग्रामीणों ने बताया कि मनरेगा योजना के तहत लाखों रुपये खर्च कर पिछले साल तालाब का ईंटीकरण कार्य पूरा किया गया था. कई दशक पूर्व इस तालाब की सुंदरता लोगों को आकर्षित करती थी. तालाब की पिंड पर बैठकर लोग सुकून महसूस करते थे. गांव में जब भी भीषण अग्नि प्रकोप हुआ, तब इन्हीं तालाबों की बदौलत ग्रामीणों ने आग पर काबू पाया. तालाब के पानी से ग्रामीणों की दिनचर्या पूरी होती थी व आसपास के गांवों के जानवर भी यहीं पानी पीते थे. वर्तमान समय में स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. तालाब की आधे से अधिक जमीन पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा जमा लिया है. आर्थिक रूप से संपन्न लोगों द्वारा पक्का मकान भी बना लिया गया है. चारों ओर बने मकानों से तालाब घिर गया है. कई घरों की नाली का पानी तालाब में गिरने से पानी दूषित हो चुका है. अब लोग तालाब में हाथ-पैर धोने से भी परहेज करने लगे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जिन पूर्वजों ने शौक से गांव में तालाब का निर्माण कराया, उन्होंने कभी यह नहीं सोचा होगा कि आने वाली पीढ़ी इसका अस्तित्व ही मिटा देगी. जिस तेजी से तालाब की जमीन पर अतिक्रमण जारी है, उससे कुछ ही वर्षों में तालाब का वजूद समाप्त हो जायेगा. ग्रामीणों ने कहा कि तीन दशक पूर्व यह तालाब गांव की समृद्धि की पहचान था, लेकिन आज अतिक्रमण व गंदगी से बदहाल होता जा रहा है. ग्रामीणों ने चेताया कि यदि समय रहते जल संचय पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में जल संकट का खामियाजा भुगतना पड़ेगा. कुछ लोग जमीन हड़पने के चक्कर में जल स्रोतों का अस्तित्व मिटा रहे हैं. प्रखंड क्षेत्र के अधिकतर तालाब, ताल व तलैया अतिक्रमण के शिकार हो चुके हैं, लेकिन न तो ग्रामीणों का ध्यान है और न ही जनप्रतिनिधि व विभागीय पदाधिकारी गंभीर नजर आ रहे हैं. इस संबंध में पूछे जाने पर प्रभारी सीओ नारायण प्रसाद ने बताया कि तालाब पर हुये अतिक्रमण पर संज्ञान लिया जायेगा. अंचल कर्मी को भेजकर शीघ्र जांच करायी जायेगी व नियम संगत कार्रवाई की जायेगी. इस संबंध में पूछे जाने पर प्रभारी सीओ नारायण प्रसाद ने बताया कि तालाब पर हुये अतिक्रमण पर संज्ञान लिया जायेगा. अंचल कर्मी को भेजकर शीघ्र जांच करायी जायेगी व नियम संगत कार्रवाई की जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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