Kaimur News : किसानों के खेतों तक अब तक नहीं पहुंच पायी बिजली

Edited by PANCHDEV KUMAR
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बिजली कनेक्शन के लिए एग्रीमेंट कराये हुए बीत गये आठ साल

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भभुआ शहर.

एक तरफ सरकार और विद्युत विभाग किसान फीडर योजना के तहत सस्ती व निर्बाध बिजली देने का घोषणा कर रही है. वहीं, दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान करती नजर आ रही है. भभुआ प्रखंड क्षेत्र स्थित मनिहारी पंचायत कटरा गांव निवासी किसान हरिशंकर बिंद, परमशिला देवी, मुझुन देवी सहित कई अन्य स्थानीय किसानों का कहना है कि बोरिंग के लिए बिजली कनेक्शन के लिए एग्रीमेंट कराये आठ साल हो गया, तो किसी का छह साल. लेकिन, आज तक उनके खेतों तक विद्युत विभाग बिजली का तार-पोल सहित अलग से ट्रांसफाॅर्मर नहीं लगा पाया है. वहीं, ग्रामीणों ने बताया कि गांव के ट्रांसफाॅर्मर से बिजली कनेक्शन लेने पर ग्रामीण विद्युत तार को नोच देते हैं. बोरिंग नही चलने देते हैं. इससे विद्युत विभाग से बिजली का कनेक्शन लेने व विद्युत बिल भरने के बावजूद डीजल पंप पर आश्रित रहना पड़ता है.

ग्रामीणों ने बताया कि बिजली विभाग से इसकी शिकायत करने पर उनके द्वारा बार-बार यह कहा जाता है कि किसान फीडर से अलग लाइन खींचकर उनकी बोरिंग तक कनेक्शन कर दिया जायेगा. इससे वे खेती के लिए निर्बाध बिजली का उपयोग कर सकेंगे. इस आश्वासन के बाद कई अन्य किसानों ने भी विद्युत एग्रीमेंट शुल्क जमा करवा दिया और आवश्यक कागजात भी पूरे कर दिये. इसके बावजूद इसके अब तक न तो बिजली का तार पोल लगाया गया और न ही चेंबर तक कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है. उनका कहना है कि विभाग से कई बार शिकायत करने के बावजूद सिर्फ आश्वासन ही मिलता है. कभी फाइल लंबित होने का बहाना, तो कभी ठेकेदार की अनुपस्थिति की बात कहकर मामला टाल दिया जाता है. किसानों का आरोप है कि यह स्थिति सिर्फ उनके गांव की नहीं, बल्कि प्रखंड क्षेत्र के अन्य कई अन्य गांवों में भी यही हाल हैं. किसानों की मांग है कि विभाग जल्द से जल्द स्थलीय निरीक्षण कर लाइन बिछवाने का कार्य शुरू करें, ताकि ग्रामिणों की खेती-किसानी प्रभावित न हो. इधर, जब इस विषय में बिजली विभाग के संबंधित अधिकारी प्रोजेक्ट एसडीओ चंदन कुमार से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि किसान फीडर योजना के अंतर्गत तार-पोल लगाने की प्रक्रिया जारी है, जांच कर कार्यवाही की जायेगी.

कहते हैं ग्रामीण1. बोरिंग तक बिजली कनेक्शन नहीं होने से डीजल पंप के सहारे खेती बाड़ी करनी पड़ती है. जबकि, मेरे चेंबर के बगल से ही हाइवोल्टेज 11000 का तार गुजरा हुआ है. विद्युत एग्रीमेंट कराये दह वर्ष हो गये और आज तक विभागीय लापरवाही के कारण विद्युत तार पोल नहीं लग पाया. इससे किसानों को खेती-किसानी में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. विभाग के अधिकारियों को चाहिए कि खेतों तक बिजली कनेक्टशन पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाये.

– हरिशंकर बिंद2. सरकार द्वारा बार-बार घोषणा की जा रही है कि किसानों को बिजली की समस्या नहीं होगी. किसान फीडर से जोड़ा जायेगा. लेकिन, आज तक तार पोल नहीं गढ़ पाया है. कभी गांव के ट्रांसफाॅर्मर से बिजली कनेक्शन लेने की कोशिश की जाती है, तो ग्रामीणों द्वारा तार नोच दिया जाता है. इससे डीजल पंप के सहारे खेती-बाड़ी करना पड़ता है. विभाग से पूछने पर बताया जाता है कि कंपनी सर्वे कर रही है. आपका हो गया होगा या बरसात से पहले काम हो जायेगा. जबकि बरसात भी आ गयी और रोपनी का कार्य भी शुरू हो गया. लेकिन आज तक विभागीय उदासीनता के कारण स्थिति ज्यों की त्यों बनी है.

– प्रमोद गुप्ता.

3. एक तरफ सरकार किसानों को बिजली मुहैया करने की बात करती है, तो वहीं विभाग के निष्क्रियता के चलते किसान को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बोरिंग के लिए बिजली कनेक्शन का एग्रीमेंट कराये आठ साल बीत गये. लेकिन, आज तक न तो उनकी कंपनी सर्वे करने के लिए आयी और न ही चैंबर तक बिजली कनेक्शन लग पाया. विभाग का चक्कर लगाते लगाते हम सभी अब किसान थक चुके हैं. किसानों को पंप सेट से महंगे दर पर पटवन करना पड़ता है. इसमें अधिक रुपये खर्च होते हैं.

– मोती बिंद

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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