ट्रैक्टर अनुदान में गड़बड़ी पर कार्रवाई में आयी सुस्ती
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अब तक सभी प्रखंडों से नहीं मिली कृषि समन्वयकों की सूची 55 किसानों और आठ ट्रैक्टर एजेंसियों पर भी नहीं कसा शिकंजा भभुआ नगर : जिले में कृषि यांत्रिकरण योजना के तहत 55 किसानों द्वारा अनुदान की राशि को गलत तरीके से हासिल करने के मामले में होनेवाली कार्रवाई सुस्त गति से चल रही है. […]
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अब तक सभी प्रखंडों से नहीं मिली कृषि समन्वयकों की सूची
55 किसानों और आठ ट्रैक्टर एजेंसियों पर भी नहीं कसा शिकंजा
भभुआ नगर : जिले में कृषि यांत्रिकरण योजना के तहत 55 किसानों द्वारा अनुदान की राशि को गलत तरीके से हासिल करने के मामले में होनेवाली कार्रवाई सुस्त गति से चल रही है. इस मामले में वर्ष 2013-14 व 14-15 में कार्यरत कृषि समन्वयकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है.
इसके अलावा इस गड़बड़ी के खेल में जिले की आठ ट्रैक्टर एजेंसियों के नाम भी सामने आये हैं. विभाग द्वारा इन्हें नोटिस भेजने और इनके विरुद्ध केस किये जाने की बात कही गयी लेकिन इस दिशा में अब तक हुई कार्रवाई पर नजर डालें तो यह मामला आगे बढ़ता दिख नहीं रहा है. कृषि यांत्रिकरण योजना के तहत खरीदे गये ट्रैक्टर पर गलत ढंग से सरकारी अनुदान प्राप्त करने के मामले में जिले के 55 किसानों और आठ ट्रैक्टर आपूर्ति करनेवाली एजेंसियों को चिंहित भी किया जा चुका है.
महालेखाकार पटना के अंकेक्षण में यह खुलासा हुआ था कि जिले के विभिन्न प्रखंडों के 55 किसानों द्वारा पूर्व से ही ट्रैक्टर खरीद लिया गया था. उसी ट्रैक्टर को सरकारी अनुदान पाने के लिए बाद में कृषि एजेंसियों से नया कैश मेमो बनवा कर अनुदान के लिए लाभुकों द्वारा विभाग को दे दिया गया जबकि ट्रैक्टर खरीद की तारीख के पूर्व ही उस ट्रैक्टर का निबंधन कराया जा चुका था. इस मामले में वर्ष 2013-14 में कार्यरत कई कृषि समन्वयक भी संदेह के घेरे में हैं. यहां यह भी बताते चलें कि भभुआ में छह किसानों, भगवानपुर में नौ, नुआंव में आठ, चांद में चार, दुर्गावती में छह, रामपुर में छह, चैनपुर में तीन, मोहनिया के सात, कुदरा के दो और रामगढ़ के एक किसान को इस परियोजना के तहत अनुदान मिला था.
सिर्फ तीन प्रखंडों से आयी रिपोर्ट
इस मामले में विभाग की कार्रवाई काफी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है. वर्ष 2013-14 और 14-15 में जिले के विभिन्न प्रखंडों में कार्यरत कृषि समन्वयकों की सूची विभाग द्वारा मांगी गयी है, लेकिन अब तक मात्र चांद, दुर्गावती और चैनपुर प्रखंड से ही उक्त वर्षों में कार्यरत कृषि समन्वयकों की सूची विभाग को प्राप्त हुई है. अब देखने वाली बात यह होगी कि आखिर कब तक इस मामले में संलिप्त कृषि समन्वयकों को चिंहित कर विभाग कार्रवाई करता है. ट्रैक्टर अनुदान मामले में जिन आवेदकों द्वारा फर्जी तरीके से अनुदान का लाभ लिया गया उसका अनुमोदन कृषि समन्वयकों द्वारा ही किया गया था.
बोले डीएओ
मामले की जांच जारी है सभी बीइओ को कृषि समन्वयकों की सूची अविलंब विभाग में जमा करने के लिए निर्देशित किया गया है जो लोग भी दोषी हैं उन पर प्राथमिकी की जायेगी.
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