कभी यहां होती थीं मन्नते पूरी

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अनदेखी. 200 साल पुराना पोखर राम-जानकरी पोखरा बना क्रिकेट का मैदान नुआव : राम जानकी मंदिर पोखरा का इतिहास काफी प्राचीन है. इसका निर्माण करीब 200 साल पहले जायसवाल वंशजों ने कराया था. लोगों का मानना है कि उस समय इस वंशज के लोग मन्नत पूरी होने पर पोखरे में रहनेवाली मछलियों को सोने की […]

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अनदेखी. 200 साल पुराना पोखर राम-जानकरी पोखरा बना क्रिकेट का मैदान
नुआव : राम जानकी मंदिर पोखरा का इतिहास काफी प्राचीन है. इसका निर्माण करीब 200 साल पहले जायसवाल वंशजों ने कराया था. लोगों का मानना है कि उस समय इस वंशज के लोग मन्नत पूरी होने पर पोखरे में रहनेवाली मछलियों को सोने की नथुनी पहनाया करते थे.
लेकिन, आज यह पोखरा उपेक्षित होकर अपने अस्तित्व खोने के कगार पर है, फिर भी इसके जीर्णोंद्धार के लिए कोई प्रशासनिक पदाधिकारी या जनप्रतिनिधि पहल करने की कोशिश नहीं कर रहा. सबसे विडंबना तो यह है कि इस मंदिर व पोखरे की देख रेख के लिए नियुक्त समिति के व्यवस्थापक भी जायसवाल वंशज के है, जबकि इस मंदिर के नाम 15 बिघा उपजाऊ जमीन है. इसकी बंदोबस्ती से प्रति वर्ष 58 हजार रुपये समिति को मिलता है, फिर भी पोखरा उपेक्षित क्यों है?
1966 के अकाल मे पहली बार सूखा था पोखरा .जानकारी के अनुसार, 1966 में अकाल के दौरान पोखरे का पानी सूखा था. चूंकि नुआंव में जिले का नामी पशु मेला लगता है. 1980 तक बाहर से अपने मवेशी लेकर मेला मे आने वालें व्यापारी अपने मवेशियों को इसी पोखरें का पानी पिलाते थे. इतना ही नही बाजार के लोग इसी पोखरे के पानी से खाना बनाते थे. इस पोखरे के पानी के संरक्षण के लिए इसके पानी से खेतों की सिंचाई पर भी लोगों ने प्रतिबंध भी लगा रखा था.
क्यों उपेक्षित है पोखरा . इस मंदिर के प्रबंधन कमेटी की लापरवाही से पोखरे की स्थिति काफी खराब हो चुकी है. बाजार के लोगों ने इसमें कूड़ा फेंकना शुरू कर दिया है और कमेटी मूक दर्शक बनी है.
1980 के बाद से यह पोखरा धीरे-धीरे उपेक्षा का शिकार होने लगा और आज स्थिति यह है कि पिछले पांच साल से हर साल पोखरा गरमी आते ही सूख जाता है और इसमे बच्चें क्रिकेट खेलते नजर आते हैं. सुप्रीम कोर्ट बढ़ते जल संकट व समाप्त होते तालाब व पोखरों को बचाने के लिए सरकार को आदेश दिया था.
एमएलसी ने पूरे नहीं किये वादे
ग्रामीणों की माने, तो पिछले वर्ष नुआव पहुचे भाजपा के नव निर्वाचित विधान पार्षद संतोष कुमार सिंह ने इस ऐतिहासिक पोखरें के सौंदरीकरण के लिए 20 लाख रुपये खर्च करने की घोषणा की थी. इसकों लेकर लोगों मे काफी उत्साह था. इतना समय बितने के बाद भी एमएलसी ने अभी तक इस दिशा मे कोई पहल नहीं की.
क्या कहते हैं एमएलसी
पोखरा के सौंदर्यीकरण के संबंध मे जब एमएलसी संतोष कुमार सिंह से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि वहां के लोग दो गुटों मे बंट चुके हैं. इससे कुछ दिक्कत आ रही है, लेकिन पंचायत चुनाव की कांउटिंग होने के बाद इस पर पहल की जायेगी.
क्या कहते है व्यवस्थापक
इस संबंध मे मंदिर कमेटी के व्यवस्थापक रवींद्र कुमार जायसवाल ने बताया कि मंदिर की जमीन वाले खेत से सालाना 58 हजार रुपये मिलता है, जिसमे तीन हजार रुपयें प्रतिमाह पुजारी को दिये जाते हैं. शेष रुपये कृष्ण जन्माष्टमी व नवरात्र पर खर्च हो जाता है. अभी कमिटी के पास कुछ भी राशी नही है.
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