बिहार उपचुनाव परिणाम : भभुआ से BJP प्रत्याशी रिंकी रानी पांडेय जीतीं, कहा- पति के अधूरे काम को पूरा करेंगी

भभुआ : बिहार में भभुआ विधानसभा निर्वाचनक्षेत्रकेलिए 11 मार्च को संपन्न करायेगये उपचुनाव में भाजपा कोबड़ीसफलता मिली है. भभुआ सीट परआज सुबह से जारी मतगणना समाप्त हो चुकी है और यहां से भाजपा प्रत्याशी रिंकी रानी पांडेय ने कांग्रेस के शंभू पटेल को लगभग 15 हजार से अधिक मतों से हरा दिया है. भाजपा की […]
भभुआ : बिहार में भभुआ विधानसभा निर्वाचनक्षेत्रकेलिए 11 मार्च को संपन्न करायेगये उपचुनाव में भाजपा कोबड़ीसफलता मिली है. भभुआ सीट परआज सुबह से जारी मतगणना समाप्त हो चुकी है और यहां से भाजपा प्रत्याशी रिंकी रानी पांडेय ने कांग्रेस के शंभू पटेल को लगभग 15 हजार से अधिक मतों से हरा दिया है.
भाजपा की प्रत्याशी रिंकी रानी पांडेय ने भभुआ उपचुनावमें जीत का श्रेय जनता को दिया है. रिंकी पांडेय ने कहा कि पति के अधूरे काम को वो पूरा करेंगी. गौर हो कि बिहार के भभुआ विधानसभा सीट पर बीते रविवार को उपचुनाव हुआ. साल 2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भभुआ सीट से भाजपा के आनंद भूषण पांडे ने जीत हासिल की थी. उनके निधन से यह सीट खाली हुई. इस सीट परभाजपा ने अपने दिवंगत विधायक आनंदभूषण पांडेय की पत्नी रिंकी रानी पांडेय को प्रत्याशी बनाया था, जबकि कांग्रेस ने इस सीट से शंभु पटेल कांग्रेस को मैदान में उतारा था.
भभुआ सीट को लेकर कांग्रेस पहले तीखे तेवर दिखाये थे. इस सीट पर पहले राजद चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन कांग्रेस के तेवरों को देखते हुए उसने यह सीट छोड़ दी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह ने कहा था कि अगर महागठबंधन में कांग्रेस को भभुआ सीट नहीं मिली, तो वो तीनों उपचुनाव क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे. बाद में कांग्रेस के प्रभारी अध्यक्ष कौकब कादरी और तेजस्वी यादव ने बैठक कर तय किया कि यहां से कांग्रेस ही चुनाव लड़े.
भाजपा ने तत्कालीन राजद-जदयू-कांग्रेस महागठबंधन के पक्ष में जनसमर्थन के बीच 2015 में भभुआ विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी. जिले में जन संघ पार्टी से 1969 में चंद्रमौली मिश्र के विधायक बनने के बाद भाजपा को जीत के लिए 46 वर्ष का इंतजार करना पड़ा था. 2015 के विधान सभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी आनंद भूषण पांडेय उर्फ मंटू पांडेय के जीतने पर यहां पहली बार कमल खिला है. भाजपा से चुनाव लड़ने के तीसरे प्रयास में उन्हें सफलता मिली थी. आनंद भूषण पांडेय ने अक्टूबर 2005 से बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ना शुरू किया. वर्ष 2010 के चुनाव में वे भाजपा से लड़े, जिसमें उन्हें 400 मत से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दल ने भी उनमें विश्वास व्यक्त करते हुए 2015 के चुनाव में पुन: उन्हें टिकट देकर चुनाव लड़ने का अवसर प्रदान किया.
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