डिजिटल इंडिया के दौर में स्कूलों के कंप्यूटर फांक रहे धूल

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निजी एजेंसियों का करार हुआ खत्म, जिले में मात्र एक कंप्यूटर टीचर की नियुक्ति भभुआ नगर : तकनीक के इस युग में कंप्यूटर नॉलेज की महत्ता किसी से छिपी नहीं, जहां एक ओर सरकार डिजिटल इंडिया का नारा दे रही है. वहीं, सरकारी स्कूलों के बच्चों को कंप्यूटर की बेसिक जानकारी तक नहीं है. हाईटेक […]

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निजी एजेंसियों का करार हुआ खत्म, जिले में मात्र एक कंप्यूटर टीचर की नियुक्ति
भभुआ नगर : तकनीक के इस युग में कंप्यूटर नॉलेज की महत्ता किसी से छिपी नहीं, जहां एक ओर सरकार डिजिटल इंडिया का नारा दे रही है. वहीं, सरकारी स्कूलों के बच्चों को कंप्यूटर की बेसिक जानकारी तक नहीं है. हाईटेक जमाने में सभी काम कंप्यूटर के माध्यम से हो रहे हैं.
लेकिन, जिले के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा आज भी सपना बना हुआ है. सरकार स्कूलों की व्यवस्था सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई योजनाएं चला रही हैं. स्कूलों में समय-समय पर ज्ञान विज्ञान से संबंधित प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं. लेकिन, कंप्यूटर एजुकेशन सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए कब सुलभ होगा, यह कहना मुश्किल प्रतित हो रहा है.
उल्लेखनीय है कि जिले के 32 हाईस्कूलों में आईएल एंड एफएस और एडुकॉम कंपनी को तीन वर्षों के लिए कंप्यूटर शिक्षा हेतु प्राधिकृत किया गया था. लेकिन, इनका करार खत्म होने के बाद कंपनी द्वारा सारा सिस्टम स्कूल को हैंडओवर किया जा चुका है, जिसके बाद इन स्कूलों में भी ट्रेंड कंप्यूटर शिक्षकों के नहीं रहने से लाखों रुपये के कंप्यूटर सिस्टम धूल फांक रहे हैं.
अपग्रेड हाईस्कूल की स्थिति खस्ता : बात करें जिले के हाईस्कूलों की तो नौवीं से 12वीं वर्ग के छात्र-छात्राओं की अन्य सब्जेक्ट की बात छोड़ भी दें, तो कंप्यूटर एजुकेशन के मामले में ये स्कूल पूरी तरह फेल हैं. ग्रामीण स्तर तक हायर एजुकेशन की शिक्षा सुलभ कराने के उद्देश्य से जिले में कुल 55 स्कूलों को विगत वर्षों में अपग्रेड किया गया. लेकिन, इन स्कूलों में भी जहां सब्जेक्ट व क्लासवाइज टीचरों की नियुक्ति नहीं की जा सकी है. वहीं, कंप्यूटर एजुकेशन अब भी दूर की कौड़ी नजर आ रही है.
101 हाईस्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा पूरी तरह ठप : कंप्यूटर शिक्षा को लेकर सरकार कितनी गंभीर है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कैमूर जिले में मात्र एक कंप्यूटर शिक्षक की बहाली हुई है. वहीं, कुछ शिक्षकों को कंप्यूटर एजुकेशन के लिए ट्रेंड किया गया. लेकिन, सरकार का यह फॉमूर्ला सफल नहीं हो पाया. इस तरह जिले में 101 हाईस्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा पूरी तरह ठप हो चुकी है.
कंप्यूटर शिक्षा की चाह दिल में ही दफन : शहर के ही टाउन हाईस्कूल में कंप्यूटर सिस्टम की चोरी होने के बाद यहां नियुक्त एक कंप्यूटर शिक्षक बच्चों की सिर्फ थ्योरी क्लास ही लेते हैं.
वहीं, अन्य कई स्कूलों में रखरखाव के अभाव में सिस्टम धूल फांक रहे हैं, तो कई जगहों पर सिस्टम चोरी हो चुकी है. इस व्यवस्था को देखते हुए कुछ स्टूडेंट‍्स या तो निजी संस्थानों में कंप्यूटर का कोर्स कर रहे हैं या फिर आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राएं कंप्यूटर शिक्षा की अपनी चाह को दिल में ही दबा लेते हैं.
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