Junior Doctors Strike : पटना एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने दी 24 मई से कार्य बहिष्कार की दी चेतावनी, जानिये क्या है मांग

रेजिडेंट डॉक्टरों और उनके परिजनों को कोविड 19 संक्रमण से बचाने के लिए बिहार के अन्य सरकारी अस्पतालों पीएमसीएच एनएमसीएच, आइजीआइएमएस जैसी सुविधाओं को मुहैया जाने की मांग को लेकर पटना एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने 24 मई से कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है.
फुलवारीशरीफ. रेजिडेंट डॉक्टरों और उनके परिजनों को कोविड 19 संक्रमण से बचाने के लिए बिहार के अन्य सरकारी अस्पतालों पीएमसीएच एनएमसीएच, आइजीआइएमएस जैसी सुविधाओं को मुहैया जाने की मांग को लेकर पटना एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने 24 मई से कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है.
डॉक्टरों ने कोरोना संक्रमित होने पर बेड न मिलने का आरोप लगाते हुए एम्स में 20 बेड रिजर्व करने की मांग की है. रेजिडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन ने इस संबंध में पटना एम्स निदेशक को पत्र लिखकर चेतावनी भी दी है.
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन पटना एम्स के अध्यक्ष डॉ विनय कुमार ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स को इस सुविधा से वंचित किया जा रहा है, जिसका परिणाम यह सामने आ रहा है कि जो रेजिडेंट डॉक्टर्स संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं.
डॉ विनय ने बताया कि एम्स निदेशक डॉ पीके सिंह को लिखे पत्र में मांग की है कि कोविड इलाज में मिलने वाली सुविधाएं मुहैया करायी जाएं और एम्स रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए एम्स पटना में पांच वेंटिलेटर सहित कुल 20 रिजर्व आइसीयू बेड की भी व्यवस्था दी जाये.
शहर के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के कोविड वार्ड में ड्यूटी कर रहे एमबीबीएस फाइनल इयर के छात्रों (जूनियर डॉक्टर) ने शुक्रवार को सांकेतिक हड़ताल की. करीब 50 जूनियर डॉक्टरों ने तीन घंटे तक काम बंद रख अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की.
उन्होंने कहा कि कोविड वार्ड में ड्यूटी कर रहे फाइनल इयर के छात्रों का 50 लाख रुपये का बीमा और 40 हजार रुपये महीने पगार नहीं दी गयी, तो वे कोविड वार्ड में ड्यूटी नहीं करेंगे. करीब तीन घंटे तक सभी जूनियर डॉक्टरों ने निदेशक के चेंबर का घेराव किया.
इधर, डॉक्टरों की सांकेतिक हड़ताल की जानकारी लगते ही निदेशक के निर्देश पर डॉ मनीष मंडल व अन्य सीनियर डॉक्टर जूनियर डॉक्टरों के पास पहुंचे. करीब एक घंटे तक वार्ता के बाद आश्वासन मिलते ही डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म कर दी.
जूनियर डॉक्टरों की मांग को कॉलेज प्रशासन ने मान लिया है. इसके बाद डॉक्टरों ने हड़ताल को खत्म कर दिया. करीब तीन घंटे तक अस्पताल में अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही.
वहीं, आइजीआइएमएस के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मनीष मंडल ने बताया कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए मौजूदा समय में हड़ताल करना ठीक नहीं है. छात्रों से शांतिपूर्वक बातचीत हुई और उन्हें एक शिफ्ट में एक हजार रुपये देने की घोषणा की गयी. बीमा के लिए भी अस्पताल प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा जायेगा.
Posted by Ashish Jha
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By Prabhat Khabar News Desk
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