अरवल में कुपोषित बच्चों का शुरू हुआ भौतिक सत्यापन अभियान, पोषण ट्रैकर ऐप से हो रही निगरानी

Author Nishikant kumr|Edited by Nikhil Anurag
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Arwal News: जिलाधिकारी अमृषा बैंस के निर्देश पर अरवल जिले में कुपोषित बच्चों के भौतिक सत्यापन का विशेष अभियान शुरू किया गया है. पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से चिन्हित बच्चों की जांच कर उन्हें तत्काल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.

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Arwal News: जिला पदाधिकारी अमृषा बैंस के निर्देशानुसार अरवल जिले की सभी पांच बाल विकास परियोजनाओं के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से चिन्हित गंभीर कुपोषित एवं मध्यम कुपोषित बच्चों के वजन और लंबाई के भौतिक सत्यापन का विशेष अभियान चलाया जा रहा है.

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भदासी पूर्वी आंगनबाड़ी केंद्र पर हुआ सत्यापन

अभियान के तहत जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस) माला कुमारी की मौजूदगी में भदासी पूर्वी आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों का वजन एवं ऊंचाई मापकर उनका भौतिक सत्यापन किया गया. इस दौरान पोषण ट्रैकर ऐप में दर्ज आंकड़ों का मिलान करते हुए बच्चों की वास्तविक पोषण स्थिति का आकलन किया गया.

माइक्रोप्लान के अनुसार चल रहा अभियान

महिला पर्यवेक्षिकाओं एवं बाल विकास परियोजना कार्यालयों द्वारा पूर्व निर्धारित माइक्रोप्लान के अनुसार जिलेभर में यह सत्यापन अभियान संचालित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य पोषण ट्रैकर ऐप पर दर्ज आंकड़ों की पुष्टि कर कुपोषित बच्चों की वास्तविक स्थिति का पता लगाना तथा उन्हें समय पर आवश्यक स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं उपलब्ध कराना है.

कुपोषित बच्चों की होगी नियमित निगरानी

जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया है कि सत्यापन के दौरान चिन्हित प्रत्येक गंभीर एवं मध्यम कुपोषित बच्चे की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए. साथ ही आईसीडीएस और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर बच्चों को पोषण परामर्श, स्वास्थ्य जांच और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए.

जरूरत पड़ने पर एनआरसी में कराया जाएगा भर्ती

डीएम ने कहा कि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को आवश्यकता पड़ने पर पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कर समुचित चिकित्सकीय एवं पोषण संबंधी देखभाल सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को निर्देश दिया कि अभियान को गंभीरता और गुणवत्ता के साथ संचालित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र बच्चा सत्यापन और उपचार से वंचित न रहे. यह अभियान जिले में कुपोषण की रोकथाम और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य एवं समुचित पोषण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.

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