जहानाबाद में कमजोर मानसून से धान की रोपनी पर संकट, अब तक सिर्फ 12% लक्ष्य हुआ पूरा

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सूखा पड़ा धान के बिचड़े का खेत | Prabhat Khabar Network

सूखा पड़ा धान के बिचड़े का खेत

जहानाबाद जिले में कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खरीफ सीजन के अहम दौर में पर्याप्त बारिश न होने से धान की रोपनी बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे सूखे का खतरा गहरा गया है. किसानों ने सरकार से तत्काल राहत की मांग की है.

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जहानाबाद. जिले में इस वर्ष कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खरीफ सीजन के सबसे अहम दौर में पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की रोपनी बुरी तरह प्रभावित हुई है. कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 12 प्रतिशत धान की रोपनी ही हो सकी है. पिछले वर्ष की तुलना में यह स्थिति काफी खराब है, जिससे जिले में सूखे का खतरा गहराने लगा है.

सूख रहे बिचड़े, किसानों की बढ़ी चिंता

जिले के अधिकांश गांवों में खेत सूखे पड़े हैं. रोपनी के लिए तैयार धान के बिचड़े पानी के अभाव में पीले पड़ने लगे हैं. किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो बिचड़े पूरी तरह खराब हो जाएंगे. ऐसे में दोबारा नर्सरी तैयार करनी पड़ेगी, जिससे खेती की लागत बढ़ जाएगी और उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा.

डीजल पंप से सिंचाई, बढ़ रही खेती की लागत

कुछ किसानों ने निजी बोरिंग, नलकूप और डीजल पंप के सहारे खेतों में रोपनी शुरू की है, लेकिन डीजल की बढ़ती कीमतों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. जिन खेतों में पहले ही रोपनी हो चुकी है, वहां भी पानी की कमी के कारण जमीन में दरारें पड़ने लगी हैं. छोटे और सीमांत किसानों का कहना है कि लगातार सिंचाई कर पाना उनके लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं है.

कृषि विभाग ने जताई बारिश की उम्मीद

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की रोपनी के लिए जुलाई सबसे उपयुक्त समय होता है. यदि इसी अवधि में पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. जिला कृषि पदाधिकारी ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने पर रोपनी की रफ्तार बढ़ सकती है.

किसानों ने सरकार से की तत्काल राहत की मांग

किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से नहरों में जल्द पानी छोड़ने, डीजल अनुदान की प्रक्रिया को सरल बनाने और कृषि फीडरों के माध्यम से निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है. उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इस वर्ष धान की खेती गंभीर रूप से प्रभावित होगी.

मानसून पर टिकी किसानों की उम्मीदें

कृषि विभाग के आंकड़े और खेतों की मौजूदा स्थिति संकेत दे रही है कि जिले में खरीफ सीजन संकट के दौर से गुजर रहा है. यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिसका सीधा असर किसानों की आय और जिले की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. फिलहाल किसानों की निगाहें मानसून और प्रशासन की राहत योजनाओं पर टिकी हैं.


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