जहानाबाद में खुलेआम बिक रहा मांस-मछली और मुर्गा, सरकारी नियमों की उड़ रही धज्जियां

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शहर के सब्जी मंडी में खुलेआम आने जाने वाले रास्ते पर बेच जा रहा है मुर्गा | Prabhat Khabar Network

शहर के सब्जी मंडी में खुलेआम आने जाने वाले रास्ते पर बेच जा रहा है मुर्गा

जहानाबाद जिले में खुले में मांस, मछली और मुर्गा बेचने पर लगी रोक का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। बिना लाइसेंस के कई दुकानदार धड़ल्ले से बिक्री कर रहे हैं, जबकि प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

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Jehanabad News: बिहार सरकार द्वारा खुले में और सार्वजनिक रास्तों पर मांस, मछली एवं मुर्गा बेचने पर रोक लगाए जाने के बावजूद जहानाबाद जिले में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है. जिले के हाट-बाजारों, कस्बों और शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों पर मांस, मछली और मुर्गा की बिक्री धड़ल्ले से जारी है. कई दुकानदारों के पास आवश्यक लाइसेंस भी नहीं हैं, बावजूद इसके प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से यह कारोबार निर्बाध रूप से चल रहा है.

मुख्य बाजारों में खुलेआम हो रही बिक्री

जहानाबाद नगर क्षेत्र के सब्जी मंडी, काको रोड, राजा बाजार, ऊंट मोड़, मलहचक मोड़, मेन रोड, अरवल मोड़, कोर्ट परिसर के आसपास और महावीर मंदिर के पीछे की गलियों में खुलेआम मांस और मुर्गे की बिक्री की जा रही है. कई स्थानों पर जानवरों के कटे हुए हिस्सों को खुले में लटकाकर ग्राहकों को आकर्षित किया जाता है.

लाइसेंस के बिना कारोबार पर भी रोक

नगर पालिका अधिनियम 2007 के अनुसार मांस, मछली और मुर्गा बेचने के लिए नगर परिषद या नगर निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य है. साथ ही बिक्री निर्धारित स्थानों और तय मानकों के अनुरूप ही की जा सकती है. इसके बावजूद जिले में बड़ी संख्या में ऐसे विक्रेता हैं जो बिना लाइसेंस के कारोबार कर रहे हैं.

क्या कहता है नगर पालिका अधिनियम 2007

कानून के अनुसार बूचड़खानों और मांस विक्रय केंद्रों को अधिसूचित एवं निर्धारित क्षेत्रों में संचालित किया जाना चाहिए. बिक्री के दौरान मांस को पर्दे या रंगीन शीशों से ढंककर रखना अनिवार्य है ताकि वह आम लोगों की नजर में न आए. इसके अलावा स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और नियमित निरीक्षण का भी प्रावधान है.

धार्मिक स्थलों और पर्वों के दौरान भी प्रतिबंध

नियमों के अनुसार मंदिरों और धार्मिक स्थलों के आसपास मांस की बिक्री नहीं की जा सकती. सावन, छठ और अन्य प्रमुख धार्मिक पर्वों के दौरान भी मांस बिक्री पर प्रतिबंध लागू रहता है. इसके बावजूद कई स्थानों पर इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है.

पशु संरक्षण कानून की भी अनदेखी

बिहार पशु संरक्षण एवं सुधार अधिनियम 1955 के तहत गाय के वध पर पूर्ण प्रतिबंध है. वहीं विशेष परिस्थितियों में ही निर्धारित आयु के बैल के वध की अनुमति दी जाती है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में इन प्रावधानों की भी अनदेखी हो रही है.

नियम उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान

नगर पालिका अधिनियम 2007 की धारा 345 के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना, माल जब्ती और दुकान सील करने तक का प्रावधान है.

क्या बोले एसडीओ

अनुमंडल पदाधिकारी राजीव रंजन सिन्हा ने कहा कि मांस, मछली और मुर्गा बेचने वाले दुकानदारों को नगर परिषद से लाइसेंस लेना अनिवार्य है. लाइसेंस प्राप्त करने के बाद भी उन्हें निर्धारित मानकों का पालन करना होगा. उन्होंने कहा कि खुले में और सार्वजनिक रास्तों पर मांस बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. साथ ही बाजार समिति क्षेत्र में इसके लिए अलग स्थान निर्धारित करने की प्रक्रिया चल रही है.


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