बारिश के बाद भी परेशानी कम नहीं हुई

कादो किचड़ से भरी जमीन। | Prabhat Khabar Network
झारसुगुड़ा में भारी बारिश के बाद जलभराव और गंदगी से लोग परेशान हैं। बीमारियों का खतरा बढ़ा और कई घरों को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण है।
झारसुगुड़ा प्रतिनिधि : मौसम की शुरुआती बारिश ने झारसुगुड़ा शहर की बदहाल तस्वीर सामने ला दी है. बारिश रुकने के बाद भी शहर के कई इलाकों में जल निकासी की समस्या बनी हुई है. हाल ही में हुई भारी वर्षा के कारण कई क्षेत्रों में पानी की निकासी नहीं हो सकी, जिससे सड़कें और बस्तियां तालाब जैसी नजर आने लगी थीं. खासकर मंगल बाजार स्थित गौस कॉलोनी और ईगलटा क्षेत्र के लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा. हालांकि अब अधिकांश स्थानों से पानी निकल चुका है, लेकिन चारों ओर फैली गंदगी, कीचड़ और सीलन के कारण लोगों की परेशानियां कम नहीं हुई हैं. जलभराव के चलते मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है. मानसून की पहली ही बारिश में शहर की कई नालियां और नाले उफन पड़े. कई स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्यों से मिट्टी और मलबा बहकर नालियों में जमा हो गया, जिससे जल निकासी पूरी तरह बाधित हो गई. सबसे अधिक समस्या निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज और रेलवे के अन्य विकास कार्यों के कारण उत्पन्न हुई है. शहर के मुख्य क्षेत्रों में रेलवे के निर्माण कार्यों से जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हुई है. पुराना बस स्टैंड, क्लॉक टॉवर मंदिर के आसपास का इलाका, हुकुआ गोवाम कॉलोनी, पुरुनाबस्ती तथा रेलवे टीआई कॉलोनी सहित कई क्षेत्रों में जलभराव की गंभीर स्थिति बनी रही। कई जगहों पर समुचित ड्रेनेज व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों की जमीनों से अस्थायी नालियां खोदकर लगभग 24 घंटे बाद बारिश का पानी निकाला गया. मंगल बाजार की गौस कॉलोनी में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली. नगर परिषद ने पंपों की सहायता से जल निकासी कराई, जिससे पानी तो कम हुआ, लेकिन अधिकांश मकानों में सीलन भर गई है. कई घरों की दीवारें कमजोर होकर दरारें पड़ने की स्थिति में पहुंच गई हैं, जिससे किसी भी समय हादसे की आशंका बनी हुई है. जलभराव वाले क्षेत्रों में कचरा और गंदा पानी जमा रहने से बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है. वार्ड संख्या 21 के अंतर्गत बुरोमाल क्षेत्र में एक कच्चे मकान के ढहने की सूचना भी मिली है. नगर परिषद के उपाध्यक्ष बेणुगोपाल पाणिग्रही ने बताया कि बाढ़ के बाद जैसी स्थिति बनती है, वैसी ही स्थिति इस समय नगर के कई इलाकों में देखने को मिल रही है. ऐसे में लोगों को महामारी और अन्य बीमारियों से बचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.
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