दो दशक बाद भी ताजे हैं सेनारी नरसंहार के घाव
Updated at : 19 Mar 2019 5:45 AM (IST)
विज्ञापन

जहानाबाद : नब्बे का दशक इलाके के लिए नरसंहारों का दशक था. एक के बाद एक रूह कंपाने वाले नरसंहारों के दौर में इन पर राजनीतिक रोटियां भी खूब सेंकी गयी. तत्कालीन जहानाबाद अब अरवल जिले के करपी प्रखंड अंतर्गत सेनारी गांव में 18 मार्च, 1999 को 400-500 की संख्या में आये एमसीसी उग्रवादियों ने […]
विज्ञापन
जहानाबाद : नब्बे का दशक इलाके के लिए नरसंहारों का दशक था. एक के बाद एक रूह कंपाने वाले नरसंहारों के दौर में इन पर राजनीतिक रोटियां भी खूब सेंकी गयी. तत्कालीन जहानाबाद अब अरवल जिले के करपी प्रखंड अंतर्गत सेनारी गांव में 18 मार्च, 1999 को 400-500 की संख्या में आये एमसीसी उग्रवादियों ने देर शाम गांव में ऐसा कहर बरपाया था जिसका दंश आज भी लोगों के मन में गड़ा है.
गांव की घेराबंदी कर नक्सलियों ने पुरुषों को खींच-खींच कर घर से निकाला था और गांव के ठाकुरबाड़ी के पास ले जाकर एक-एक करके बर्बर तरीके से मौत के घाट उतार दिया. महिलाओं को रोने के लिए छोड़ दिया है, ऐसा कहकर बाप के सामने बेटे और भाई के सामने भाई को तड़पा-तड़पाकर वीभत्स हत्या कर दी. इस नरसंहार में गांव के 35 लोग मारे गये थे. पूरा देश इस नृशंस हत्याकांड के दहल गया था.
बाद में अदालती कार्रवाई के द्वारा कुछ नरसंहार के आरोपितों में से 10 लोगों को फांसी और तीन को उम्र कैद सुनायी गयी थी. कुछ को बरी कर दिया गया और कुछ अभी भी फरार चल रहे हैं. वहीं पीड़ित परिजनों को पांच-पांच लाख के मुआवजे दिये गये थे.
कोई मुआवजा, कोई सांत्वना या दिलासा इनके जख्मों को भर नहीं पाया. सेनारी कांड से एक पूरी जेनरेशन को ही समाप्त कर दी गयी थी. जब भी होली आती है तो वह खौफनाक मंजर परिजनों के सामने आज भी घूम जाता है. हर साल बरसी पर हजारों पीढ़ी आसपास के गांव से मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए जुटती है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




