जमुई. आदिवासियों व परंपरागत जंगल वासियों के घर उजाड़ने और विस्थापित करने के खिलाफ जनजाति अधिकार रक्षा मंच व खैरा लोक मंच के नेतृत्व में आदिवासियों ने सोमवार को जिला मुख्यालय में विरोध प्रदर्शन किया. विरोध प्रदर्शन में लक्ष्मीपुर, बरहट, खैरा समेत विभिन्न प्रखंड के दर्जनों आदिवासी महिलाएं और पुरुष शामिल हुए. विरोध प्रदर्शन शहर के श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम के पास से निकली और रजिस्ट्री कचहरी होते हुए समाहरणालय पहुंचे, जहां सात सूत्री मांगों को लेकर डीएम को मांग पत्र सौंपा गया. विरोध प्रदर्शन कर रहे आदिवासी समाज के लोगों ने कहा कि हमलोग आदिवासी व परंपरागत जंगलवासी जंगल और पहाड़ों में वर्षों से पीढ़ी दर पीढ़ी चास वास के साथ रहते आ रहे हैं. जंगल, पहाड़ पर जन्मजात प्राकृतिक, परंपरागत और नैतिक रुप से इसके भागौलिक स्थिति के मुताबिक सांस्कृतिक रूप से हमारा अधिकार है. भारतीय संविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 13(3) क के अनुसार हमारे रीती रिवाज और जंगल में हमारे परंपरागत ग्राम सभा के सत्ता में निहित शक्ति को मान्यता और संरक्षण दी गई है, साथ ही वनाधिकार कानून 2006 में भी हमे आदिवासियों और परंपरागत जंगलवासी को चास वास सहित वनोत्पाद के उपयोग का अधिकार दिया गया है. लेकिन गैर आदिवासी व गैर परंपरागत जंगलवासी के नाम पर निर्मित ग्राम सभा के जरिए परंपरागत ग्राम सभा के अधिकार में हस्तक्षेप और अतिक्रमण किया जा रहा है. हाल के दिनों में स्थानीय दबंगों व वन माफिया के मिलीभगत से वन विभाग ने बरहट मौजा, थाना संख्या 2, प्लॉट संख्या 2277 पर रह रहे अजय हेंब्रम को आरक्षित वन का हवाला देकर घर झोपड़ी उजाड़ दिया और 15 घरों को उजाड़ने को नोटिस और धमकी देकर चला गया है. लक्ष्मीपर में भी 30 घरों को उजाड़ने का षडयंत्र चल रहा है. जबकि चास वास पर काबिज होकर गुजर बसर करनेवाले आदिवासी खैराजाति लोगों की सूचि पूर्व में डीएम को दिया जा चुका है. आदिवासियों ने वन विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासियों का जल, जंगल, जमीन, पहाड़, खनिज मौजूदा संविधान का संरक्षण और उसके मूल भावना पर कुठराघात करके वर्तमान केंद्र सरकार, राज्य सरकार और उसका वन विभाग कॉरपोरेटों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों को वन संसाधनों को सौप देना चाहती है. वहीं आदिवासियों ने डीएम से मांग करते हुए कहा कि वन विभाग व स्थानीय दबंगों के मिलीभगत से आदिवासियों के घर उजाड़ने, जलाने, लूटने पर रोक लगाई जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाय और जिसका घर उजाड़ा गया है उसे उचित मुआवजा दिया जाय, वन विभाग, स्थानीय दबंगों व प्रशासन के द्वारा जंगल में रह रहे आदिवासियों व परंपरागत जंगल वासियों को डराने धमकाने पर रोक लगाई जाए, आदिवासियों और परंपरागत जंगलवासियों पर लादे गए फर्जी मुकदमें वापस हो, जंगल में रह रहे आदिवासियों व परंपरागत जंगलवासियों को वासगीत का पर्चा दिया जाय, वनाधिकार कानून 2006 और पेसा कानून 1996 सख्ती से लागू की जाय, जल, जंगल, जमीन को विकास परियोजनाओं के नाम पर कारपोरेट को हवाले करना बंद हो तथा डी बंधोपाध्याय की भूमि सुधार आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक कर उसके सिफारिशों को लागू किया जाये. मौके पर दर्जनों आदिवासी समुदाय के महिलाएं और पुरुष मौजूद थे.
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