मशरूम की महक से बदल रही रोहित की किस्मत

मेहनत और तकनीकी कौशल के दम पर मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार का जरिया बनाकर रोहित झा क्षेत्र के युवाओं के लिए 'प्रेरणापुंज' बन गये हैं.
गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत मौरा निवासी रोहित झा को आरसेटी व जन शिक्षण संस्थान से मिली मशरूम उत्पादन की शिक्षा-दीक्षा जमुई. मेहनत और तकनीकी कौशल के दम पर मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार का जरिया बनाकर रोहित झा क्षेत्र के युवाओं के लिए ”प्रेरणापुंज” बन गये हैं. जिले के गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत मौरा गांव निवासी 25 वर्षीय रोहित झा को आरसेटी और जन शिक्षण संस्थान से मशरूम उत्पादन की मिली शिक्षा-दीक्षा ने रोहित को न केवल तकनीकी रूप से सक्षम बनाया, बल्कि एक उद्यमी के रूप में सोचने का आत्मविश्वास भी दिया. रोहित इस सफलता के पीछे सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण की बड़ी भूमिका मानते हैं. आज खुद के पैरों पर खड़ा होकर बिना किसी सरकारी सहायता के अपने गांव में रहकर ही सम्मानजनक आजीविका कमा रहे हैं. इन दो संस्थानों से मिले प्रशिक्षण के आधार पर रोहित झा अपने उत्पाद के लिए अब बाजारीकरण का खाका भी तैयार किया है. सोशियोलॉजी से स्नातक डिग्री में अर्जित किये गये इस शिक्षा में कौशल के मिश्रण से रोहित मशरूम उत्पादन कर आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है. रोहित झा बताते हैं कि पिता स्व सुरेन्द्र झा के निधनोपरांत वह परिवार के आर्थिक तंगहाली से त्रस्त थे. इस विवशता को आड़े न आने देते हुए मशरूम उत्पादन शुरू की. उनके द्वारा उत्पादित मशरूम स्थानीय बाजारों में अब धीरे-धीरे अपनी पहचान बना ली है. फिलहाल, रोहित अपने ही घर के आंगन में एक कमरे तैयार कर उसमें मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं. बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए अब रोहित अपने व्यवसाय का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं. रोहित का मानना है कृषि आधारित ऐसे लघु उद्योग ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेंगे.
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