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तेल व मसालेदार भोजन को कहें ना: डॉ मनीष कुमार

गर्मी के दिनों में हमें सादा भोजन को देनी चाहिए प्राथमिकता

जमुई. गर्मी के दिनों में स्वास्थ्य को सही रखने, लू और डी-हाइड्रेशन का शिकार होने से बचने के लिए हमें अपने खानपान में भी परिवर्तन लाने की आवश्यकता है. इस बाबत चिकित्सक डॉ मनीष कुमार बताते हैं कि गर्मी के मौसम में तैलीय भोजन का प्रयोग नहीं करना चाहिए. वैसे भोजन का प्रयोग करने से भी बचना चाहिए जिसमें मसालों का अधिक प्रयोग किया जाता है. डॉक्टर कुमार बताते हैं कि मांसाहारी भोजन मीट, मछली आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए. डि-हाईड्रेशन का शिकार होने से बचने के लिए हमें दिन भर में कम से कम आठ लीटर पानी अवश्य पीना चाहिए. उन्होंने बताया कि अगर संभव हो सके तो समय-समय पर ओआरएस का घोल भी लेते रहना चाहिए. इसके अलावा चिकित्सक बताते हैं कि गर्मी के दिनों में हमें सादा भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए. इसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी सब्जियां तथा साग का इस्तेमाल करना चाहिए. अपने भोजन में हमें मौसमी फलों को भी जगह देनी चाहिए. फलों का इस्तेमाल अधिक करना चाहिए. चिकित्सक बताते हैं कि अगर हमारा खान-पान सही रहता है तो गर्मी के मौसम में हम खुद को बहुत अधिक सुरक्षित कर पाते हैं.

लू से बचने के घरेलू उपाय भी हैं कारगर, अब भी गांवों में काम आता है भूने आम को पीसकर लगाने का नुस्खा:

गर्मियों का मौसम शुरू होते ही लू लगने का खतरा बहुत बढ़ जाता है. ऐसे में लोग तरह-तरह की सावधानियां बरतने की बात कहते हैं, पर कई कारणों से लोग ये सब सावधानियां नहीं बरत पाते हैं और लू की चपेट में आकर बीमार पड़ जाते हैं. इसके बाद तरह-तरह के इलाज और दवा का सेवन करने को उन्हें विवश होना पड़ता है. आज भी ग्रामीण इलाकों में लू से बचने का एक बहुत ही कारगर नुस्खा इस्तेमाल में लाया जाता है. दरअसल लू लगने के बाद भूने आम का लेप लगाने से बुखार में तुरंत राहत मिलती है और लू से पीड़ित व्यक्ति के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में अगर किसी को भी लू लगता है तो वह चिकित्सकीय इलाज के साथ-साथ इन घरेलू नुस्खों को आजमा कर भी खुद को ठीक कर सकते हैं. लू के दौरान दरअसल लोगों को काफी तेज बुखार आता है और ऐसे में अगर बुखार 104 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच जाये, तो सबसे जरूरी चीज यह है कि उसे बर्फ से सेंका जाये तथा उसके सिर पर बर्फ की पट्टी दी जाए, जिससे उसे बुखार से तुरंत राहत मिलेगी. इसके अलावे कच्चे आम को आग में भूनकर उसके गूदे का लेप लगाकर छोड़ देने से भी लू से राहत मिलती है. वहीं कई जगहों पर इसका शरबत बनाकर भी पिलाया जाता है. और सबसे मजेदार बात यह है कि आज भी गांव में यह नुस्खा बड़ा ही कारगर है. लू लगने के बाद लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावे लू लगने की हालत में चिकित्सकीय सलाह और इलाज की तुरंत आवश्यकता होती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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