पहाड़ और किऊल नदी के संगम पर बसा अतिप्राचीन बाबा पतनेश्वर धाम, जानें 850 साल पुराना गौरवशाली इतिहास

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फोटो 1  मंदिर में स्थापित कामना लिंग  2 पूजा अर्चना करते हुए तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं मंत्री श्रेयसी सिंह.(फाईल फोटो) | Prabhat Khabar Network

मंदिर में स्थापित कामना लिंग

बिहार के जमुई जिले में स्थित बाबा पतनेश्वर महादेव मंदिर आस्था और इतिहास का जीवंत संगम है. 1171 ईस्वी में प्रकट हुए शिवलिंग के दर्शन के लिए सावन में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है. जानें इस प्राचीन धाम की पूरी कहानी.

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जमुई जिले के बरहट स्थित किऊल नदी के तट पर पहाड़ी की चोटी पर विराजमान बाबा पतनेश्वर महादेव का दरबार केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था, इतिहास और शिव भक्ति की जीवंत विरासत है. मान्यता है कि करीब 1171 ईस्वी में घने जंगल के बीच पहाड़ी पर शिवलिंग मिलने के बाद इस स्थान की धार्मिक पहचान सामने आई थी. समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन बाबा पतनेश्वर के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा आज भी बरकरार है.

सावन में उमड़ता है आस्था का जनसैलाब

सावन मास की शुरुआत होते ही इस ऐतिहासिक धाम की छटा देखते ही बनती है:

  • 104 सीढ़ियां चढ़कर दर्शन: किऊल नदी में आस्था की डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष के साथ 104 सीढ़ियां चढ़कर मंदिर परिसर पहुंचते हैं.
  • मनोकामना पूर्ति: शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित कर भक्त सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं.

जंगल में प्रकट हुआ था शिवलिंग: जानें मंदिर का इतिहास

मंदिर के मुख्य पुजारी राजीव कुमार पांडेय के अनुसार:

  • 1171 ईस्वी की घटना: वर्ष 1171 में खैरमा गांव के गोस्वामी परिवार का एक व्यक्ति किऊल नदी के किनारे जंगल में लकड़ियां चुनने गया था, जहां उसकी नजर पहाड़ी पर स्थित प्राकृतिक शिवलिंग पर पड़ी.
  • खैरा रियासत से जुड़ाव: शिवलिंग मिलने की सूचना खैरा रियासत के तत्कालीन महाराज गुरुप्रसाद सिंह के पूर्वज महादेवा राजा तक पहुंची. राजा ने शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा की और कालांतर में खैरा रियासत के राजा हाथी-घोड़ों के लश्कर के साथ यहां दर्शन करने आने लगे.

शिव और शक्ति का अद्भुत संगम

पतनेश्वर धाम केवल शिव पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां शक्ति की भी विशेष आराधना होती है:

  • माता पार्वती की प्रतिमा: मुख्य मंदिर के ठीक सामने माता पार्वती की भव्य प्रतिमा स्थापित है.
  • अन्य देवी-देवता: मंदिर परिसर में भगवान गणेश, कार्तिकेय, मां दुर्गा, भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता, बजरंगबली, काल भैरव और नंदी जी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं.

जलाभिषेक से असाध्य रोग व कष्ट दूर होने की मान्यता

बाबा पतनेश्वर धाम को लेकर कई चमत्कारी लोक-मान्यताएं भी प्रचलित हैं:

  • आरोग्य की प्राप्ति: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार बाबा पतनेश्वर पर निष्ठापूर्वक जलाभिषेक करने से शारीरिक कष्ट और बीमारियां दूर होती हैं.
  • विशेष मान्यता: विशेष रूप से कुष्ठ रोग व अन्य त्वचा संबंधी बीमारियों से मुक्ति के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु यहां अर्जी लगाने पहुंचते हैं.

सियासी गलियारे से लेकर आम जनता तक गहरी आस्था

बाबा पतनेश्वर का दरबार आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ दिग्गज राजनेताओं के लिए भी अगाध श्रद्धा का केंद्र रहा है:

  • मत्था टेकने पहुंचीं कई हस्तियां: बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार सरकार की खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, पूर्व मंत्री सुमित कुमार सिंह और झाझा विधायक दामोदर रावत समेत कई जनप्रतिनिधि समय-समय पर यहां आकर पूजा-अर्चना कर चुके हैं.


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