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मौरा बालू घाट पर जांच को पहुंचे पदाधिकारी, किसानों से की बात

Updated at : 21 Dec 2025 9:19 PM (IST)
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मौरा बालू घाट पर जांच को पहुंचे पदाधिकारी,  किसानों से की बात

थाना क्षेत्र होकर बहने वाली बरनार नदी के मौरा बालू घाट से निकलने वाले आधा दर्जन सिंचाई पईन का निरीक्षण रविवार को खनिज विकास पदाधिकारी केशव कुमार पासवान व लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता के द्वारा किया गया.

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गिद्धौर. थाना क्षेत्र होकर बहने वाली बरनार नदी के मौरा बालू घाट से निकलने वाले आधा दर्जन सिंचाई पईन का निरीक्षण रविवार को खनिज विकास पदाधिकारी केशव कुमार पासवान व लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता के द्वारा किया गया. इस दौरान मौरा, मांगोबंदर, धोबघट, निजूआरा, प्रधानचक के दर्जनों किसान मौजूद थे. बताते चलें कि उक्त गांवों के किसानों का अपनी खेती से जुड़ी जमीन को बंजर बनने से रोकने के लिए बालू बंदोबस्त घाट को पूर्व की तरह बंद कराने के लिए लिखित आवेदन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को डाक के माध्यम से भेजा गया था, जिसपर सचिवालय पटना से आये निर्देश के बाद पदाधिकारियों की टीम मौरा नदी के बालू घाट पर पहुंच सिंचाई पईन का निरीक्षण किया गया. इससे पूर्व भी पिछले सप्ताह डीएम से मिलकर मौरा सहित आधा दर्जन गांव के किसानों ने इस संदर्भ में ज्ञापन भी सौंपा था. इसके बावजूद भी बालू संवेदक मौरा नदी के बालू घाट से बदस्तूर बालू खनन करने व सिंचाई पईन के मुहाने पर ईंट पत्थर से भरकर सड़क बनाने का कार्य कर रहे थे, पदाधिकारियों द्वारा किसानों को इस दिशा में समुचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, बालू बंदोबस्त घाट मौरा से बालू के हो रहे खनन को लेकर मौरा गांव के किसान सच्चिदानंद मंडल, विजय रावत, राजेंद्र रावत, गिरिधर कुमार साह, अशोक सिंह, अवधेश सिंह, मनोज सिंह, मुकेश रावत, रमेश रावत, बबलू सिंह, सुभाष रावत, रवींद्र रावत, कालू रावत, दिनेश रावत, विधाता रावत आदि दर्जनों किसानों ने बताया कि मौरा पुवारी सिंचाई पैन, मंजला बाहियार सिंचाई पैन, पछियारी सिंचाई पैन, कोरियाका सिंचाई पैन, धोबघट सिंचाई पैन, इन सभी सिंचाई पैन से हम आधा दर्जन से अधिक गांवों के किसानों का सैंकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि की सिंचाई होती है, हमारे खेतीबाड़ी का एक मात्र साधन नदी से जुड़ा यह सिंचाई पईन है, अगर इस बालू घाट से बालू का उठाव लगातार होता रहा तो सिंचाई पईन का अस्तित्व मिट जाएगा व हमारे सैकड़ों एकड़ खेत सिंचाई के अभाव में फसल उपज के लायक नहीं रहेंगे व उपजाऊ भूमि बंजर भूमि में तब्दील हो जायेगी. पूर्व में भी सरकार द्वारा 2017-18 में इस घाट की बंदोबस्ती की गयी थी. जिसका किसानों ने कृषि हित में बालू बंदोबस्ती का विरोध जताया था, तत्कालीन जिलाधिकारी ने मामले में जांच के आदेश भी दिए थे. माननीय उच्च न्यायालय में भी कुणाल कुमार बनाम बिहार सरकार एक लोक याचिका दायर की गयी थी, सीडब्लुजेसी 8325/2018 माननीय न्यायालय वहां के भौगोलिक स्थिति के जांच को देखते हुए 2018 में निविदा रद्द कर दी थी, लेकिन फिर से मौरा नदी घाट पर बालू उठाव की अनुमति दे दी गयी है. इसकी वजह से इस इलाके के किसान कई महीनों से परेशान हैं. किसानों ने कहा कि अगर बालू खनन बंद नहीं करवाया गया तो सैकड़ों किसान अपने खेतों को बंजर होने से बचाने के लिए आमरण अनशन को विवश हो जाएंगे. जांच कमेटी द्वारा फाइनल रिपोर्ट सरकार को भेजी जायेगी. जिले भर में चिह्नित बालू घाटों पर नियमानुसार बालू खनन का कार्य जारी है. इस दिशा में भी समुचित कार्रवाई की जाएगी. केशव कुमार पासवान, खनिज विकास पदाधिकारी, जमुई

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANKAJ KUMAR SINGH

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