जमुई में दादा का अधूरा सपना पोती ने किया पूरा, पायल की सफलता पर छलक उठीं पूर्व पुलिस अधिकारी की आंखें

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 29 May 2026 11:43 AM

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जमुई में दादा का अधूरा सपना पोती ने किया पूरा

Jamui News: कभी दादा ने खाकी वर्दी पहनकर बिहार पुलिस की सेवा की थी. आज उसी घर की पोती ने बिहार पुलिस में चयनित होकर उनका अधूरा सपना पूरा कर दिया. जमुई की पायल सिंह की यह कहानी संघर्ष, सपनों और परिवार की भावनाओं से जुड़ी प्रेरणादायक मिसाल बन गई है.

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जमुई से गुलशन कश्यप की रिपोर्ट.
Jamui News: नगर परिषद क्षेत्र के बिहारी मोहल्ला की रहने वाली पायल सिंह ने बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल कर पूरे इलाके का नाम रोशन किया है. पायल की यह सफलता सिर्फ एक सरकारी नौकरी पाने की कहानी नहीं, बल्कि दादा के अधूरे सपने को पूरा करने का भावुक सफर भी है. सेवानिवृत्त पुलिस पदाधिकारी वैद्यनाथ सिंह की आंखें उस वक्त भर आईं, जब उनकी पोती ने खाकी वर्दी पहनने का सपना सच कर दिखाया.

30 साल की सेवा, लेकिन अधूरा रह गया था सपना

वैद्यनाथ सिंह ने करीब 30 वर्षों तक बिहार पुलिस में सेवा दी थी. उनकी हमेशा इच्छा थी कि परिवार की अगली पीढ़ी में भी कोई पुलिस सेवा में जाए. हालांकि यह सपना उनके बेटे-बेटियों के जरिए पूरा नहीं हो पाया. अब उनकी पोती पायल सिंह ने कठिन मेहनत और संघर्ष के दम पर इस सपने को साकार कर दिया.

कबड्डी के मैदान से खाकी वर्दी तक का सफर

पायल सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, खेल के मैदान में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं. वह कबड्डी की बेहतरीन खिलाड़ी हैं और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं. पायल का कहना है कि खेल ने उन्हें अनुशासन, धैर्य और संघर्ष करना सिखाया. यही अनुभव प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में भी काम आया.

मां के निधन के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत

पायल के पिता पिंटू सिंह ने बताया कि बेटी की मां के निधन के बाद परिवार कठिन दौर से गुजरा, लेकिन पायल ने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने हर चुनौती का डटकर सामना किया और अपने लक्ष्य पर लगातार फोकस बनाए रखा. आज उनकी सफलता पर पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है.

बेटियों के लिए बनी प्रेरणा

सुधांशु युवा क्लब बिहारी के संस्थापक सदस्य सह शिक्षक छोटू सिंह ने बताया कि पायल बचपन से ही प्रतिभाशाली रही हैं. पढ़ाई और खेल दोनों में उन्होंने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया. स्थानीय लोगों का कहना है कि पायल की सफलता गांव और समाज की बेटियों के लिए प्रेरणा है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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