कटौना अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र आइसीयू में, अस्पताल में थर्मामीटर तक नहीं

प्रखंड की कटौना पंचायत स्थित वार्ड संख्या 9 में संचालित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कटौना की हालत बेहद ख़राब है.
बरहट . प्रखंड की कटौना पंचायत स्थित वार्ड संख्या 9 में संचालित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कटौना की हालत बेहद ख़राब है. करीब आठ हजार अधिक मतदाताओं की सेहत की जिम्मेदारी उठाने वाला यह अस्पताल खुद ही इलाज के इंतजार में पड़ा है. यहां मूलभूत सुविधाओं का ऐसा अभाव है कि मरीजों का इलाज नहीं, बल्कि उनकी मजबूरी का मजाक बन रहा है. मंगलवार को पंचायत के मुखिया कपिलदेव प्रसाद के निरीक्षण में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुलकर सामने आ गयी. ग्रामीणों की शिकायत पर जब मुखिया अस्पताल पहुंचे तो एक-एक कर खामियां उजागर होती चली गयीं. अस्पताल में पानी, बिजली, शौचालय, टेबल ,पंखा जैसी जरूरी सुविधाएं थीं ही नहीं. जबकि सरकारी कागजों में सब कुछ दुरुस्त दिखाया जा रहा है. निरीक्षण के दौरान अस्पताल में तैनात तीन स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित पाये गये. मौजूद कर्मियों ने गैरहाजिर एएनएम के बारे में फील्ड ड्यूटी का हवाला दिया. लेकिन सच्चाई इससे कहीं अलग नजर आयी. अस्पताल के कई कमरे जर्जर हैं और दरवाजे टूटकर बिखर चुके हैं. सात लाख रुपये की लागत से लगाये गये दरवाजे ने महज पांच महीने में ही जवाब दे दिये. जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. तीन साल से गायब जीएनएम
स्वास्थ्य विभाग ने यहां डॉक्टर समीर राज, जीएनएम संध्या कुमारी, एएनएम नीलम कुमारी, कंचन कुमारी, ममता कुमारी, रीमा कुमारी और डाटा ऑपरेटर कमलजीत कुमार की तैनाती की है.मुखिया के निरीक्षण में एएनएम नीलम कुमारी ,डॉ समीर राज और डाटा ऑपरेटर को छोड़ बाकी सभी कर्मी गायब मिले. जबकी जीएनएम संध्या कुमारी तीन साल से अस्पताल नहीं आने की बात बताया गया हैं और वे अपना डेपुटेशन उप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मलयपुर में करा लिया है .इस लापरवाही का खामियाजा सीधे तौर पर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है.जबकी अस्पताल में फार्मासिस्ट नहीं है.अस्पताल में जांच उपकरण खराब
अस्पताल की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां मरीजों का बुखार मापने के लिए थर्मामीटर तक उपलब्ध नहीं है. बीपी और शुगर जांच के उपकरण खराब पड़े हैं. रोजाना 10-15 मरीज यहां पहुंचते हैं, लेकिन बिना जांच के ही उन्हें दवा देकर लौटा दिया जाता है.अस्पताल कर्मियों के अनुसार अव्यवस्था को लेकर कई बार बीएचएम से शिकायत की गयी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
संसाधनों के अभाव में डॉक्टर भी बेबस
ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर समीर राज ने बताया कि ओपीडी में न बेड है, न टेबल और न ही ब्लड प्रेशर मापने की मशीन. पंखा नहीं होने से गर्मी में मरीजों और डॉक्टर दोनों को परेशानी झेलनी पड़ती है. खिड़कियां टूटी हुई हैं और आसपास झाड़-झंखाड़ उग आए हैं. बिजली कटते ही पूरा सिस्टम ठप हो जाता है, क्योंकि इनवर्टर या बैटरी की कोई व्यवस्था नहीं है.
शौचालय में दरवाजा नहीं, पानी की भी किल्लत
अस्पताल का शौचालय तीन साल से बिना दरवाजे के है. जिससे खासकर महिला कर्मियों और मरीजों को भारी असुविधा होती है. सफाई कर्मी की व्यवस्था नहीं होने से परिसर में गंदगी पसरी रहती है.पीने के पानी की भी गंभीर समस्या है. बोरिंग के नाम पर महज एक छोटा मोटर लगाकर नल-जल से जोड़ दिया गया है. जिससे नियमित पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती.
क्या कहते हैं पंचायत के मुखिया
मुखिया कपिलदेव प्रसाद ने कहा कि निरीक्षण में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी और कर्मियों की अनुपस्थिति सामने आई है. मामले की शिकायत विभाग के वरीय अधिकारियों से की जाएगी.
क्या कहते हैं जिला चिकित्सा पदाधिकारी
वहीं इस संबंध में जिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार सिंह ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी. यदि ऐसी स्थिति है तो जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी.
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