1924 में महाराजा चंद्रचूड़ सिंह ने गोशाला के लिए दान में दी थी जमीन

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जमुई : नगर क्षेत्र के पुरानी बाजार स्थित रामकृष्ण गोशाला की स्थापना के लिए वर्ष 1924 में महाराजा चंद्रचूड़ सिंह ने कुल जमुई में 2.75, खैरा प्रखंड के हरणी में 15 एकड़,सिंगारपुर में 2.68 एकड़ और उझंडी में 9 डिसमिल जमीन दान में दी थी. लेकिन अपने स्थापना काल से लेकर आज तक गोशाला की […]

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जमुई : नगर क्षेत्र के पुरानी बाजार स्थित रामकृष्ण गोशाला की स्थापना के लिए वर्ष 1924 में महाराजा चंद्रचूड़ सिंह ने कुल जमुई में 2.75, खैरा प्रखंड के हरणी में 15 एकड़,सिंगारपुर में 2.68 एकड़ और उझंडी में 9 डिसमिल जमीन दान में दी थी. लेकिन अपने स्थापना काल से लेकर आज तक गोशाला की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है.

जिसके कारण यहां रखे जाने वाले पशुओं की सही तरीके से आज तक देखभाल नहीं हो पा रही है और नगर क्षेत्र में स्थित एक मात्र गोशाला प्रशासनिक उदासीनता के कारण अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को विवश है. जानकारी के अनुसार गौशाला का संचालन एक समिति के द्वारा किया जाता है जिसके पदेन अध्यक्ष अनुमंडल पदाधिकारी होते हैं

और इसके अलावे सचिव, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्षा का चुनाव सर्वसम्मति से किया जाता है. साथ ही गोशाला के बेहतर देखभाल के लिए 100 से भी अधिक लोग हैं. लेकिन इसके बावजूद भी गोशाला आज तक उपेक्षित है और इसका सही तरीके से विकास नहीं हो पाया है. समिति के सदस्यों की माने तो 2012 के बाद इसमें पशु को रखने की व्यवस्था की गयी और वर्तमान समय में गौशाला में कुल 16 बाछी,13 बाछा, 12 गाय समेत कुल 60 पशु को रखा गया है.

गोशाला को दुकान और गोदाम से होती है आय: रामकृष्ण गोशाला को प्रत्येक माह 70 हजार रुपया की आय होती है जिससे पशुओं के दवा और चारा की व्यवस्था की जाती है. इसके अलावे तीन गौ सेवक कार्यरत हैं जिन्हें 9 हजार रुपया प्रतिमाह के हिसाब से भुगतान किया जाता है और गोशाला के प्रबंधक को भी प्रतिमाह 9 हजार रुपया का भुगतान होता है. समिति के सचिव राजीव रंजन भालौटिया ने बताया कि गोशाला के पास वर्तमान में 32 दुकान और 16 गोदाम है. जिनसे 34 हजार रुपया मासिक आय होती है.
इसके अलावे दूध की बिक्री से प्रत्येक माह 30 हजार रुपया की आय होती है. साथ ही गोबर अन्य साधनों से 5000 रुपया मासिक आय होती है. जिला नगर विकास अभिकरण के द्वारा गोशाला में लगभग 40 लाख की लागत से विवाह भवन का भी निर्माण किया गया है. लेकिन इसके बावजूद भी गौ सेवक और प्रबंधक के वेतन का भुगतान अपने खर्चे पर करना पड़ता है. गोशाला के पास हरणी में मौजूद जमीन के अधिकांश हिस्सों का स्थानीय लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है और खैरा प्रखंड के सिंगारपुर में 2.68 एकड़ जमीन लीज पर दी गयी है. लेकिन इसके बावजूद भी प्रशासन और स्थानीय लोगों का सहयोग नहीं मिलने से गोशाला की स्थिति बदतर होती जा रही है.
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