Indian Railways: कमजोर इंटरनेट से एंटी फॉग डिवाइस के संचालन में हो रही मुश्किल, 24 घंटे तक लेट चल रही ट्रेन

मौसम की मार से ट्रेनों सेवा लगातार बाधित हो रहा है. इससे निबटने के लिए रेलवे द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर किये गये इंतजाम भी अब बेअसर साबित हो रहे हैं. स्थिति यह है कि राजेंद्र नगर राजधानी तेजस एक्सप्रेस जैसी ट्रेन भी 24 घंटे तक की देरी से पहुंच रही है.
आनंद तिवारी, पटना
मौसम की मार से ट्रेनों सेवा लगातार बाधित हो रहा है. इससे निबटने के लिए रेलवे द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर किये गये इंतजाम भी अब बेअसर साबित हो रहे हैं. स्थिति यह है कि राजेंद्र नगर राजधानी तेजस एक्सप्रेस जैसी ट्रेन भी 24 घंटे तक की देरी से पहुंच रही है. रेलवे ने पूर्व मध्य रेलवे की अधिकतर ट्रेनों में फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाया है. लेकिन, जीपीएस आधारित ये फॉग सेफ्टी डिवाइस बेअसर साबित हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि हाइस्पीड इंटरनेट की सुविधा नहीं मिलने से ये डिवाइस सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं. नतीजतन पूमरे ने 28 फरवरी तक कई ट्रेनों काे रद्द कर दिया है, तो कुछ ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द करने का निर्णय लिया गया है. इस कारण पहले से इन ट्रेनों में बुक यात्रियों के ऑनलाइन टिकट रोजाना कैंसिल हो रहे हैं.
रेलवे ने अधिकतर ट्रेनों में तीन-तीन लाख रुपये खर्च कर एंटी फॉग डिवाइस को लगवाया है. ये एंटी फॉग डिवाइस जीपीएस सिस्टम पर काम करते हैं. इसके संचालन के लिए हाइस्पीड इंटरनेट की जरूरत होती है. कई बार जब ट्रेनें अपनी यात्रा के दौरान ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं, जहां सिग्नल नहीं होता है. ऐसे में ये डिवाइस काम नहीं कर पाते. इससे लोको पायलट को ऐसे रूटों पर ट्रेन चलाने में परेशानी का सामना करना पड़ जाता है. अधिकारियों ने बताया कि ये डिवाइस सिर्फ सिग्नल के स्वरूप को कैच करते हैं कि सिग्नल का रंग क्या है. कोहरे से इसका कोई तात्पर्य नही है. डिवाइस इंस्टॉल होने के बाद भी कोहरे के कारण ट्रैक की पारदर्शिता बेहद कम होती है. इससे ट्रेनों के अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है, लिहाजा तकनीक के बावजूद भी ट्रेनों का परिचालन रद्द करना पड़ जाता हैं.
सबसे ज्यादा परेशानी उन यात्रियों को हो रही है. जिन्होंने कई दिनों पहले ही टिकट बुक करवा लिये थे, अब फिर से उन्हें परेशानी से जूझना पड़ रहा है. क्योंकि कई ट्रेनों में लंबी वेटिंग चल रही है. इनके अलावा कई ट्रेनें बदले रूट से भी संचालित हो रही हैं, तो कई यात्रियों को ट्रेन बदलकर भी सफर करना था. इन पर दोहरी मार पड़ रही है.
पूमरे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी वीरेंद्र कुमार का कहना है कि इंजन में लगे फॉग सेफ्टी डिवाइस जीपीएस से उस रेलखंड में स्थित समस्त सिग्नलों की दूरी की जानकारी लोको पायलट को उपलब्ध कराती है. इससे लोको पायलट ट्रेन की रफ्तार को आसानी से नियंत्रित कर लेता है. फॉग सेफ्टी डिवाइस लगने के बाद ट्रेनों की गति बढ़ी है. पहले कोहरे में ट्रेनों की गति 60 किमी प्रति घंटा तय थी, जो बढ़ कर 75 किमी प्रति घंटा हो गयी है. वहीं, यात्रियों की सुरक्षा व संरक्षा को भी प्रमुखता देना है, क्योंकि ज्यादा कोहरा होने में दिक्कत होती है. इससे दुर्घटना की भी आशंका बनी रहती है.
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