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Bihar Weather: सावन में महसूस हो रही है जेठ की तपिश, पारा 37 डिग्री के पार, किसान परेशान

Updated at : 27 Jul 2023 8:37 PM (IST)
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Bihar Weather: सावन में महसूस हो रही है जेठ की तपिश, पारा 37 डिग्री के पार, किसान परेशान

बिहार में आसमान से आग की बारिश हो रही हो. दोपहर के वक्त सड़कें लोगों से खाली रह रही हैं. लोग गर्मी से बचने के लिए घरों में दुबके रहते हैं. उमस भरी गर्मी से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. तापमान में भी लगातार वृद्धि ही दर्ज की गयी. किसान भी अपने सूखे खेतों को देख कर परेशान हैं.

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Bihar Weather : सावन हरियाली का प्रतीक होने के साथ झमाझम बारिश का महीना माना जाता है. इस महीने में बारिश से सुकून मिलने से लोगों में नया जोश पैदा होता है. लेकिन इस साल स्थिति उलटी है. जुलाई के अंतिम सप्ताह में भी भीषण गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है. वहीं दूसरी और बारिश न होने से किसान निराश हैं. वे अपने खेतों को देखते हैं और आसमान की ओर निहारते हैं. किसान अभी भी आश लगाये हैं कि बारिश होगी, लेकिन जिस तरह का मौसम है उससे नहीं लगता की बारिश होगी.

एक चौथाई भी नहीं हुई धान की रोपनी

इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना एक चौथाई भी धान भी रोपित नहीं हो पाया है. एक पखवारे पहले हुई बारिश से किसानों में उत्साह जागा था और धान की रोपाई शुरू कर दी थी, लेकिन दो सप्ताह से बारिश नहीं हुई. इससे किसानों ने धान की जो फसल लगायी थी वह भी सूख गयी है. किसान प्रचंड धूप को देखकर हैरान है. खेत में जाकर जब धान की सूखती पौधों को देखते है तो खासे निराश हो गये थे. इन दिनों तापमान जून की तरह ही बढ़ता जा रहा है. दोपहर में तो ऐसा लगता है जैसे आसमान से आग की बारिश हो रही हो. सड़कें लोगों से खाली हो जाती हैं. लोग गर्मी से बचने के लिए घरों में दुबके रहते हैं. उमस भरी गर्मी से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है.

आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने का पूर्वानुमान

तापमान में भी लगातार वृद्धि ही दर्ज की गयी. अधिकतम तापमान 37 डिग्री व न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहा. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक फिलहाल गर्मी से राहत के कोई आसार नहीं है आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने का ही पूर्वानुमान है. मॉनसून के दौरान इस बार गर्मी ने पिछले कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया हैं. आने वाले दिनों में दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी बढ़ने के आसार हैं. गर्मी के तेवर कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं. मौसम के मिजाज को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर बारिश न हुई तो आने वाले कई दिनों तक गर्मी का कहर और बरसेगा.

एक पखवारे से बारिश का नामोनिशान नहीं

महाराजगंज अनुमंडल में वर्षा हुए एक पखवारा हो गये. इस साल मॉनसून 22 जुलाई के बाद आया. अंतिम जून व जुलाई के पहले सप्ताह तक बारिश की स्थिति ठीक-ठाक रही. इस दौरान 183 एमएम वर्षा हुई. लेकिन, उसके बाद बादल रूठे तो बारिश बंद हो गयी. इस साल अब तक सामान्य से 45 फीसदी कम वर्षा हुई है. बारिश न होने से किसान और आमजन दोनों हलकान हैं.

सुबह छह बजे ही तीखी हो रही धूप

तेज धूप से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. सुबह छह बजे ही तीखी हो रही धूप के बाद देर शाम तक चली गर्म हवाओं से लोग परेशान रहे. आसमान साफ रहने के कारण धूप इतनी चमकीली होती है कि नजर भी चौंधिया जाती है. घर से निकलने से पहले लोगों को तेज धूप से बचाव के लिए इंतजाम भी करने पड़ रहे. लोग छाता लेकर चल रहे हैं. बारिश से नहीं, धूप से बचाव के लिए.

भीषण गर्मी से बचाव के लिए चला रहे कूलर

इस दफा मौसम का मिजाज अलग है. सावन के महीने में अमूमन लोग कूलर नहीं चलाते. लेकिन, अभी घरों से कूलर चलने की आवाज आम बात है. जेठ जैसा पारा चढ़ा है. तेज धूप और उमस ने जीना मुहाल कर रखा है. घरों से निकले लोग पसीने से तर-बतर नजर आ रहे हैं तो कूलर और पंखे भी फेल हो चुके हैं. गुरुवार को हर किसी की जुबां पर भीषण गर्मी की ही चर्चा तैरती रही. सभी बारिश की उम्मीद में आसमान पर नजर टिकाए रहे मगर उमड़ते-घुमड़ते बादल अपना जोर नहीं दिखा सके.

लेट से आया मॉनसून, बारिश भी पर्याप्त नहीं

मौसम के जानकारों के लिए भी इस बार मौसम का खेल समझ से परे है. मई से उतार चढ़ाव का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है. पहले मानसून लेट आया, फिर हवाओं ने अपना असर दिखाया. अरब सागर के तूफान ने मानसून का बेड़ा गर्क कर दिया. आषाढ़ में कुछ दिनों की रिमझिम के बाद बादल हवा हो गए. सावन से आस थी, पर वह भी सूखा बीता जा रहा है. 15 दिन से अधिक गुजर गए हैं, पर बादलों ने अपनी दस्तक समुचित तरीके से नहीं दी है.

क्या बोले अधिकारी

महाराजगंज के प्रखंड कृषि पदाधिकारी रामप्रताप सिंह ने बताया कि बारिश नहीं होने से खेती पर असर पड़ा है. 80 फीसदी रोपनी हुई है. मॉनसून के सक्रिय नहीं होने के बीच गर्मी से राहत मिलती दिखायी नहीं दे रही. गर्मी और बढ़ सकती है. आने वाले दिनों में अगर बारिश न हुई तो गर्मी के कहर से लोगों को और अधिक परेशान होना होगा. किसान डीजल अनुदान लें और रोपनी करें .

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