वैशाली के लोगों के नाम जुड़ेगी एक और उपलब्धि, बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय का जल्द उद्घाटन होने की संभावना

Updated at : 08 Jun 2025 9:50 PM (IST)
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वैशाली के लोगों के नाम जुड़ेगी एक और उपलब्धि, बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय का जल्द उद्घाटन होने की संभावना

भगवान बुद्ध की कर्मभूमि, भगवान महावीर की जन्मभूमि, आम्रपाली की रंग भूमि एवं लोकतंत्र की जननी वैशाली को पर्यटन के अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने के लिए किया जा रहा प्रयास अब सफल दिखने लगा है.

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वैशाली. भगवान बुद्ध की कर्मभूमि, भगवान महावीर की जन्मभूमि, आम्रपाली की रंग भूमि एवं लोकतंत्र की जननी वैशाली को पर्यटन के अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने के लिए किया जा रहा प्रयास अब सफल दिखने लगा है. 72 एकड़ में बन रहा बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय का काम अब अंतिम चरण में है. जल्द ही उद्घाटन होने की संभावना है. अब तक मेडिटेशन सेंटर, लाइब्रेरी, विजिटर हॉल, गेस्ट हाउस बन कर तैयार हो गया है. वहीं भगवान बुद्ध की अस्थि कलश रखने के लिए बन रहे स्तूपों का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा हो गया है. मालूम हो कि सीएम नीतीश कुमार 19 फरवरी 2019 को शिलान्यास करने के बाद निर्माण कार्य का स्वयं भी मॉनीटरिंग करते रहे हैं. कई बार वैशाली पहुंचकर कार्यों को जायजा ले चुके हैं. उनके दूरगामी सोच के परिणाम के कारण ही आज वैशाली के लोगों के नाम एक नई उपलब्धि बहुत जल्द जुड़ने वाली है. इसके उद्घाटन हो जाने के बाद पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा. राजस्थान की गुलाबी पत्थरों से किया जा रहा निर्माण बिहार सरकार द्वारा अधिग्रहित 72 एकड़ जमीन पर भवन निर्माण विभाग द्वारा बनाया जा रहा बुद्ध दर्शन संग्रहालय में मेडिटेशन सेंटर, लाइब्रेरी, विजिटर हॉल, गेस्ट हाउस, बन कर तैयार हो गया है. वहीं भगवान बुद्ध की अस्थि कलश रखने के लिए बन रहे स्तूपों का भी निर्माण कार्य भी लगभग पूरा हो गया है. इसको सजाने का काम चल रहा है. बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप का निर्माण भवन निर्माण विभाग द्वारा 4300 वर्ग मीटर भूखंड पर राजस्थान से मंगवाये गये गुलाबी पत्थरों से किया गया है. पत्थरों से निर्मित पूरी संरचना में पत्थरों को जोड़ने के लिए किसी भी प्रकार के चिपकाने वाले पदार्थ का प्रयोग नहीं किया गया है. बुद्ध स्मृति स्तूप की कुल ऊंचाई 33 मीटर है. इसका आंतरिक व्यास 38 मीटर और बाहरी व्यास 50 मीटर है. बनकर तैयार हो जाने के बाद यहां बौद्ध धर्मावलंबियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक आयेंगे. यहां के संग्रहालय में भगवान गौतम बुद्ध से संबंधित रोचक घटनाओं और बौद्ध धर्म से जुड़े प्रसंगों को दर्शाया जायेगा. 550 करोड़ की लागत हो रहा निर्माण : करीब 550 करोड़ की लागत से बुद्ध समयक दर्शन संग्रहालय का निर्माण कराया जा रहा है. यहां भगवान बुद्ध की अस्थि कलश स्थापित करने की योजना है. निर्माण कार्य एजेंसी सापुरजी पालोनजी प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रदीप विष्ट ने बताया की लगभग 550 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बुद्ध समयक दर्शन संग्रहालय में स्तूप, म्यूजियम, संग्रहालय, विजिटर सेंटर, मेडिटेशन सेंटर, गेस्ट हाउस, ओरियेंटल गैलरी, लाइब्रेरी, एमपी थिएटर आदि का निर्माण कार्य पूरा हो गया है. साथ ही गाड़ियों की पार्किंग की व्यवस्था, कैफेटेरिया के साथ साथ पूरे परिसर को व्यवस्थित रूप से सजाया जा रहा है. हजारों साल तक सुरक्षित रहेगा स्तूप बुद्ध समयक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप को आकर्षक, वास्तुशिल्प और खूबसूरत नक्काशी का का रूप दिया गया है. हाजीपुर-मुजफ्फरपुर मुख्य मार्ग से उतर की ओर से इसका मुख्य द्वार बनाया गया है. जहां भगवान बुद्ध की एक मूर्ति स्थापित होगी. अंदर प्रवेश करने पर दोनों किनारे दो म्यूजियम बने हैं. उसके बाद पर्यटक मुख्य संग्रहालय तक आयेंगे. मुख्य संग्रहालय में एक साथ दो हजार पर्यटक दर्शन कर सकेंगे. यहां प्रवेश के लिए चार द्वार के साथ साथ रैंप भी बनाया गया है. बताया गया कि यह स्तूप हजारों सालों तक सुरक्षित रहेगा. वहीं साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से पथ निर्माण विभाग द्वारा बौद्ध समयक दर्शन संग्रहालय तक जाने के लिए सड़क का निर्माण किया गया है. तैयार होने के बाद पर्यटकों की संख्या में होगा इजाफा केपी जायसवाल शोध संस्थान के निदेशक अनंत सदाशिव अलकेटर की अगुआई में 1958 में पुरातात्विक खुदाई के दौरान फाहियान एवं व्हेनसांग के यात्रा वृतांत में वर्णित तथ्यों के आधार पर वर्तमान में स्थित बौद्ध स्तूप के अंदर भगवान बुद्ध के अस्थि कलश की प्राप्ति हुई थी. कलश को 1958 से 1972 तक वैशाली के निजी संग्रहालय में रखा गया था. बाद में सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस अनमोल धरोहर को पटना में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है. इसे देखने के लिए काफी संख्या में थाइलैंड, श्रीलंका, वियतनाम, जापान, कम्बोडिया आदि देशों के पर्यटक आते है. वहीं बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय का निर्माण कार्य पूरा होने एवं भगवान बुद्ध की अस्थि कलश स्थापित होने के बाद वैशाली भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा होने की उम्मीद है. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से यहां के लोगो को रोजगार के अवसर मिलेंगे. बौद्ध दर्शन संग्रहालय के उद्घाटन में बौद्ध गुरु दलाई लामा के आने की संभावना है. इसके उद्घाटन के समय की अधिकारिक घोषणा जल्द होने की संभावना जतायी जा रही है.

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AMLESH PRASAD

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