मनरेगा से बदली वैशाली की तस्वीर, 137 खेल मैदान बने, 12.25 लाख पौधे लगे, हजारों परिवारों को मिला रोजगार

Author Kaif ahmed
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मनरेगा से बदली वैशाली की तस्वीर, 137 खेल मैदान बने, 12.25 लाख पौधे लगे, हजारों परिवारों को मिला रोजगार

Rural Development: वैशाली जिले के सभी 16 प्रखंडों में मनरेगा के तहत 137 खेल मैदान, उत्तर बिहार का सर्वश्रेष्ठ ग्रामीण हाट, 12.25 लाख पौधारोपण और हजारों आजीविका परिसंपत्तियों का निर्माण किया गया. जानिए पूरी रिपोर्ट.

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Rural Development: वैशाली जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से ग्रामीण विकास को नई गति मिली है. जिले के सभी 16 प्रखंडों में खेल मैदानों का निर्माण, ग्रामीण हाट का विकास, व्यापक पौधारोपण और आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियों के निर्माण ने ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदल दी है. इससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है.

16 प्रखंडों में बने 137 आधुनिक खेल मैदान

मनरेगा के तहत वैशाली जिले के सभी 16 प्रखंडों में कुल 137 खेल मैदान विकसित किए गए हैं. इन मैदानों में क्रिकेट, फुटबॉल, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, एथलेटिक्स ट्रैक, ऊंची कूद और लंबी कूद जैसी आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. इससे ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और खिलाड़ियों को बेहतर खेल मंच मिला है.

Ai से ली गई तस्वीर

उत्तर बिहार का सर्वश्रेष्ठ बना लालगंज का ग्रामीण हाट

लालगंज प्रखंड की बसंता जहानाबाद पंचायत में मनरेगा के तहत विकसित ग्रामीण हाट को उत्तर बिहार का सर्वश्रेष्ठ ग्रामीण हाट घोषित किया गया है. यह हाट किसानों, स्वयं सहायता समूहों (SHG) और ग्रामीण उद्यमियों के लिए कृषि उत्पादों और अन्य सामान की बिक्री का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है.

पांच वर्षों में 12.25 लाख से अधिक पौधारोपण

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वैशाली जिले में पिछले पांच वर्षों के दौरान 12.25 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं. पौधारोपण अभियान से हरियाली बढ़ी है और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिली है.

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हजारों परिवारों को मिला स्थायी रोजगार का आधार

ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से जिले की 278 पंचायतों में मनरेगा के तहत विभिन्न परिसंपत्तियों का निर्माण कराया गया है. इनमें शामिल हैं:

  • 3,685 बकरी शेड
  • 3,272 निजी खेत-पोखर
  • 332 पोल्ट्री शेड
  • अन्य पशुपालन से जुड़ी परिसंपत्तियां

इन परियोजनाओं से हजारों ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार और आय का नया स्रोत मिला है.

ग्रामीण विकास को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने कहा कि मनरेगा के माध्यम से केवल रोजगार उपलब्ध कराना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि ग्रामीण आधारभूत संरचना को मजबूत करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना भी प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि जिले में विकास कार्यों को आगे भी इसी गति से जारी रखा जाएगा.

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