Hajipur News : ब्रिटिश काल से लगने वाला मनोरा मेला आज से

Updated at : 25 Feb 2025 11:02 PM (IST)
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Hajipur News : ब्रिटिश काल से लगने वाला मनोरा मेला आज से

महाशिवरात्रि के अवसर पर ब्रिटिश काल से लगने वाला प्रसिद्ध मनोरा मेला बुधवार से शुरू हो जायेगा. मेले को लेकर मिठाइयों की दुकानें, मसाला बाजार, मीना बाजार, लकड़ी बाजार समेत अन्य दुकानें सज चुकी हैं. मनोरंजन के लिए झूले भी लगाये गये हैं. बुधवार को कलश यात्रा के साथ मेले का विधिवत उद्घाटन होगा.

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पटेढ़ी बेलसर. महाशिवरात्रि के अवसर पर ब्रिटिश काल से लगने वाला प्रसिद्ध मनोरा मेला बुधवार से शुरू हो जायेगा. मेले को लेकर मिठाइयों की दुकानें, मसाला बाजार, मीना बाजार, लकड़ी बाजार समेत अन्य दुकानें सज चुकी हैं. मनोरंजन के लिए झूले भी लगाये गये हैं. बुधवार को कलश यात्रा के साथ मेले का विधिवत उद्घाटन होगा. मेला कमेटी के पूर्व अध्यक्ष शिव प्रसाद ने बताया कि बाबा चुनेश्वरनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग पास के पोखर में खुदाई के दौरान मिली थी. उनके अनुसार, 1934 के भूकंप में मंदिर का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसे बाद में जीर्णोद्धार कर ठीक किया गया. ग्रामीणों के अनुसार, यह मेला सदियों से लगता आ रहा है. कहा जाता है कि पोखर की खुदाई के दौरान एक मजदूर का कुदाल किसी ठोस वस्तु से टकराया. जब मिट्टी हटायी गयी, तो शिवलिंग निकला, जिसमें आज भी कुदाल के कटने का निशान मौजूद है. शिवलिंग को स्थानीय लोग उठाने में असमर्थ रहे, लेकिन मनोरा गांव के शिव भक्त चन्ना भगत ने इसे आसानी से उठाकर मंदिर में स्थापित किया. इस घटना के बाद से हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर इस स्थान पर मेला लगने लगा.

शादी-ब्याह तय करने के लिए भी प्रसिद्ध है मेला

यह मेला सिर्फ खरीदारी और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है. इस मेले में शादी के लिए वर-वधू की देखा-देखी होती है और शादियां भी तय की जाती हैं. मंदिर में सालभर विवाह होते रहते हैं. पूर्व में यह मेला 15 दिनों तक चलता था, लेकिन अब फर्नीचर की दुकानें ही इतने दिनों तक लगी रहती हैं. स्थानीय लोग फर्नीचर और मसाले की खरीदारी के लिए इस मेले को प्राथमिकता देते हैं.

राजकीय मेले का दर्जा देने की मांग

मेला कमेटी के अध्यक्ष नारायण सिंह, ग्रामीण उमेश सिंह, विनोद सिंह, गुड्डू सिंह, धीरेंद्र पटेल, राजू पटेल आदि का कहना है कि यह मेला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है. ग्रामीण लंबे समय से इसे राजकीय मेले का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं. मेले की देखरेख स्थानीय ग्रामीणों द्वारा गठित मेला कमेटी करती है. सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन भी सतर्क रहती है, ताकि श्रद्धालुओं और खरीदारों को किसी प्रकार की परेशानी न हो.

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