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hajipur news. महनार महोत्सव : अब तक आयोजन समिति की बैठक नहीं, न ही रूपरेखा तय

22 Jan, 2026 6:13 pm
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hajipur news. महनार महोत्सव : अब तक आयोजन समिति की बैठक नहीं, न ही रूपरेखा तय

2024 में फरवरी और 2025 में मार्च में हुआ था आयोजन, इस बार प्रशासन खामोश

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महनार. सांस्कृतिक पहचान बन चुका महनार महोत्सव इस बार भी चर्चा में है, पर प्रशासनिक सुस्ती ने लोगों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं. जनवरी का तीसरा सप्ताह बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो आयोजन समिति की बैठक हुई है और न ही कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गई है. हर साल फरवरी या मार्च में आयोजित होने वाला यह महोत्सव स्थानीय संस्कृति, कला और जनसहयोग का प्रतीक माना जाता है. लोगों का कहना है कि इस बार प्रशासन की चुप्पी से आयोजन को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है. महोत्सव को लेकर महनार की गलियों और चौराहों पर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं. कलाकार, मंच संचालक, सजावट करने वाले और स्थानीय संस्थान इस आयोजन का हिस्सा बनने को उत्सुक हैं. पूर्व की आयोजन समिति के सदस्यों का कहना है कि महोत्सव की सफलता का आधार हमेशा जनसहयोग रहा है, इसलिए प्रशासन को इस बार भी आम लोगों को शामिल कर तैयारी शुरू करनी चाहिये.

वर्ष 2007 में हुई थी शुरुआत

महनार महोत्सव की शुरुआत वर्ष 2007 में तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी मोहन प्रसाद की पहल पर हुई थी. पत्रकारों, साहित्यकारों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से पहली बार कृषि प्रदर्शनी के मंच पर यह आयोजन हुआ था. तत्कालीन डीएम ललन सिंह ने महोत्सव का उद्घाटन किया था और उसी अवसर पर प्रकाशित स्मारिका में महनार अनुमंडल की ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान को विस्तार से प्रस्तुत किया गया था.

राजकीय दर्जे से बढ़ी प्रतिष्ठा

वर्ष 2016 में डीसीएलआर ललित कुमार सिंह के प्रयास से महोत्सव को पुनर्जीवित किया गया. 2017 में तत्कालीन विधायक शिवचन्द्र राम ने इसे राजकीय महोत्सव का दर्जा दिलाया. इसके बाद 2017 से 2019 तक महोत्सव बड़े पैमाने पर आयोजित हुआ. कोरोना काल (2020-2022) में महोत्सव नहीं हो सका. इधर दो वर्षों से एसडीओ नीरज कुमार के संयोजन में महोत्सव हो रहा है. वर्ष 2024 में महोत्सव फरवरी में और 2025 में मार्च में आयोजित हुआ था, जिसमें कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को प्रभावित किया.

जनवरी का तीसरा सप्ताह बीत जाने के बावजूद अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई पहल नहीं हुई है. पूर्व समिति सदस्यों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि तैयारी समय पर शुरू की जाए तो इस बार का आयोजन और भी भव्य हो सकता है. लोगों का मानना है कि महनार महोत्सव अब सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महनार की एकता, संस्कृति और स्वाभिमान का प्रतीक बन चुका है और इस परंपरा को जीवित रखने के लिए प्रशासन को आगे आना ही होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Abhishek shaswat is a contributor at Prabhat Khabar.

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