दहेज हत्या मामले में पति को 14 साल की सजा, पचास हजार जुर्माना भी लगाया, सास-ससुर और ननद बरी
कोर्ट
हाजीपुर की अदालत ने दहेज प्रताड़ना और हत्या के एक गंभीर मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। मृतका के पति को 14 साल सश्रम कारावास और 50 हजार जुर्माने की सजा दी गई है। पर्याप्त सबूतों के अभाव में सास, ससुर और ननद को बरी कर दिया गया है।
Hajipur Crime News : हाजीपुर में दहेज प्रताड़ना और हत्या के एक मामले में हाजीपुर की अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है. अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने मृतका के पति को दोषी करार देते हुए 14 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है. जुर्माना नहीं देने पर उसे छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. वहीं, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने और संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने मृतका की सास, ससुर और ननद को रिहा कर दिया.
बाइक और पांच लाख रुपये दहेज की मांग का आरोप
लोक अभियोजक श्याम बाबू राय ने बताया कि राजापाकर थाना क्षेत्र के अलीपुर गनवीरा गांव निवासी निशा कुमारी की शादी वर्ष 2019 में महुआ थाना क्षेत्र के शंकरपुर निवासी नवीनानंद कुमार उर्फ धनगत कुमार के साथ हुई थी.
आरोप के अनुसार, शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग बाइक और पांच लाख रुपये नकद दहेज की मांग को लेकर निशा को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे थे.
जबरन इंजेक्शन और दवा देने का आरोप
मामले में आरोप लगाया गया कि पति निशा के साथ जबरदस्ती अप्राकृतिक यौनाचार करता था. इसके बाद उसने एक कंपाउंडर को बुलाकर निशा को जबरन इंजेक्शन लगवाए और टैबलेट खिलाए. बताया गया कि कुल नौ इंजेक्शन और सात टैबलेट दिए जाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी. हालत गंभीर होने पर पति उसे हाजीपुर सदर अस्पताल में भर्ती कराकर फरार हो गया.
21 दिन तक चला इलाज, फिर हुई मौत
घटना की जानकारी मिलने पर निशा के मायके वाले सदर अस्पताल पहुंचे. डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे एनएमसीएच और फिर पटना एम्स रेफर कर दिया. एम्स में करीब 21 दिनों तक इलाज चलने के बाद निशा की मौत हो गई.पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी नवीनानंद पर पहले भी दहेज के लिए अपनी पहली पत्नी की हत्या करने का आरोप था.
इलाज के दौरान 10 जुलाई 2023 को निशा का फर्दबयान दर्ज किया गया था. इसके आधार पर महिला थाना कांड संख्या 21/23 दर्ज किया गया. शुरुआत में विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज हुआ, लेकिन विवाहिता की मौत के बाद इसमें धारा 304 बी भी जोड़ी गई. लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पति को दोषी करार देते हुए 14 वर्ष के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. सास, ससुर और ननद को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया.
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लेखक के बारे में
By अभिषेक कुमार
अभिषेक कुमार 9 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. इनकी सबसे अच्छी पकड़ क्राइम और राजनीति की खबरों पर है.
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