वैशाली: जमुनीलाल महाविद्यालय में फ्रेशर व इंडक्शन मीट का आयोजन, नई शिक्षा नीति और CBCS की दी गई जानकारी

Author Rahul Ray|Edited by Nikhil Anurag
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शैक्षणिक गतिविधियों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने से ही सर्वांगीण विकास होता है : प्राचार्य

र्यक्रम के दौरान प्राचार्य व अन्य

Hajipur Jamunilal College: जमुनीलाल महाविद्यालय परिसर में विज्ञान संकाय के नए छात्रों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम का आयोजन हुआ. नई शिक्षा नीति, चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS), और शैक्षणिक नियमों पर विस्तार से जानकारी दी गई.

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Hajipur Jamunilal College: वैशाली जिले के स्थानीय जमुनीलाल महाविद्यालय परिसर में नये शैक्षणिक सत्र के विज्ञान संकाय में नव-नामांकित छात्र-छात्राओं के लिए दीक्षारंभ-सह-स्टूडेंट इंडक्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य वीरेंद्र कुमार ने की. कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलगीत गायन और सेमेस्टर-4 की छात्राओं के स्वागत गान से हुई. कार्यक्रम का संचालन वनस्पति विज्ञान विभाग की डॉ निहारिका भारती ने किया.

विद्यार्थियों को कॉलेज के इतिहास और नई शिक्षा नीति की दी गई जानकारी

कार्यक्रम के दौरान विज्ञान संकाय के सभी शिक्षकों का विद्यार्थियों से परिचय कराया गया. इसमें डॉ अरुण दयाल, डॉ सुनील पंडित, डॉ नितिन, डॉ अमरेश, डॉ राखी, डॉ सैयद ईतजा हुसैन, डॉ विनय और डॉ अभिषेक शामिल रहे. डॉ सैयद ईतजा हुसैन ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय के इतिहास और उसकी शैक्षणिक परंपराओं से अवगत कराया. साथ ही नई शिक्षा नीति को अधिक वैज्ञानिक, समावेशी और रोजगारोन्मुख बताते हुए उसके विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई.

चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम की विस्तार से दी जानकारी

डॉ निधि रस्तोगी ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS) की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह एक छात्र केंद्रित और लचीली शिक्षा प्रणाली है, जिसमें विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार मुख्य विषय, वैकल्पिक विषय और कौशल आधारित पाठ्यक्रम का चयन कर सकते हैं. इससे छात्रों को अपनी गति से सीखने और विभिन्न विषयों का ज्ञान अर्जित करने का अवसर मिलता है.

75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य, नियमित अध्ययन पर दिया जोर

प्राचार्य वीरेंद्र कुमार ने नव-नामांकित छात्र-छात्राओं को महाविद्यालय के इतिहास, नियमों और अनुशासन संबंधी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होने के लिए 75 प्रतिशत कक्षा उपस्थिति अनिवार्य है. उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन करने और अपने शैक्षणिक लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी से ही विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है.

क्षमता निर्माण और अनुशासन पर भी हुआ मार्गदर्शन

कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ नितिन कुमार ने छात्रों को शैक्षणिक मार्गदर्शन देते हुए अनुशासन, क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) और व्यक्तित्व विकास के महत्व से अवगत कराया.

इस अवसर पर डॉ प्रीति कुमारी, डॉ श्याम किशोर सिंह, डॉ स्मृति सौरभ, डॉ अनामिका, डॉ अरिहंत नचिकेता, डॉ वैभव, डॉ रजनीश, डॉ धर्मेंद्र, डॉ सुमत, डॉ लावण्या, डॉ विभा, डॉ कंचन, डॉ प्रीती चंद्र, मोनू, कर्मचारी राजीव, विश्वजीत, शंभू, रामकुमार सहित विज्ञान संकाय के सभी छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.

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