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नेताजी ने गोपालगंज के युवाओं में जगा दी थी आजादी पाने की अलख, 1939 की ठंडी रात में अचानक पहुंचे थे प्रेम आश्रम

Updated at : 23 Jan 2023 5:30 AM (IST)
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नेताजी ने गोपालगंज के युवाओं में जगा दी थी आजादी पाने की अलख, 1939 की ठंडी रात में अचानक पहुंचे थे प्रेम आश्रम

गोपालगंज के विभिन्न स्थानों पर बैठक के बाद नेताजी पुन: प्रेमनगर आश्रम पहुंचे और रात में नेपाल के लिए निकल गये. नेताजी युवाओं में आजादी का मंत्र फूंक कर चले गये, लेकिन संत विज्ञानानंद जी महाराज उर्फ ब्रह्मचारी की और प्रेमनगर आश्रम की दिनचर्या ही बदल दी.

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प्रमोद तिवारी, गोपालगंज: तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा देने वाले आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जंग-ए-आजादी के सफर का इतिहास गोपालगंज से भी जुड़ा हुआ है. 1942 के आंदोलन में जिले के बांकुरों ने जमकर भाग लिया लेकिन 1939 में ही जिले में पहुंचे नेताजी ने यहां के युवाओं में आजादी पाने की अलख जगा दी थी. वर्ष 1939 में नेताजी ने एक-दो नहीं बल्कि जिले में चार बैठकें की थीं. भले ही मान्य इतिहास के पन्नों में नेताजी के जिले में आने की चर्चा नहीं है, लेकिन लोगों का मानना है कि नेताजी जिले में आये ही नहीं थे, बल्कि युवाओं के साथ बैठक कर अंग्रेजों को जड़ से खत्म करने का मंत्र भी दिया था. नतीजा है कि यहां बदलती पीढ़ियों के बावजूद आज भी उनके विचार प्रासंगिक हैं.

1939 में प्रेमनगर से गोपालगंज तक किया था सफर

प्रेमनगर आश्रम के महान संत रहे स्वामी आत्मानंद परमहंस जी ने एक मुलाकात में अपनी गुरु के बताये इतिहास पर चर्चा की थी. स्वामी जी के गुरु ने जो बताया, उनके अनुसार 1939 में ठंड की रात अचानक कुछ चंद साथियों के साथ नेताजी प्रेम आश्रम पधारे थे. वे चंद घंटे बात कर कहे कि ब्रह्मचारी जीवन शैली बदलो और मेरे साथ चलो. गोपालगंज के विभिन्न स्थानों पर बैठक के बाद नेताजी पुन: प्रेमनगर आश्रम पहुंचे और रात में नेपाल के लिए निकल गये. नेताजी युवाओं में आजादी का मंत्र फूंक कर चले गये, लेकिन संत विज्ञानानंद जी महाराज उर्फ ब्रह्मचारी की और प्रेमनगर आश्रम की दिनचर्या ही बदल दी.

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गुलामी और आजादी के बीच की गाथाओं को आश्रम आज भी बयां करता है

नतीजा है कि आज भी आश्रम गुलामी और आजादी के बीच की गाथाओं को बयां करता है. नेताजी के जाने के साथ ही अंग्रेजों को भगाने और तबाह करने की रणनीतियां जिले में बनने लगी और आजादी के दीवानों की टोलियाों ने अपनी गतिविधि शुरू कर दी. 1939 में नेताजी का जगाया अलख जिले के युवाओं में आजादी की जज्बे का बिगुल फूंक गया, जो आजादी मिलने तक जारी रहा.

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शहर में नेताजी ने क्रांतिकारियों में भरे जज्बात

आजादी की जंग परवान पर थी. गोपालगंज एक साधारण छोटा-सा बाजार था. वर्तमान का आंबेडकर चौक वीरान जगह थी. वरिष्ठ पत्रकार वरुण मिश्र ने बताया कि क्रांतिकारी युवाओं के साथ उस बैठक में सूबे के सीएम रहे अब्दुल गफूर, फुलदेव बाबू, कटेया के खुरहुरिया महादेव राय, झाड़ू दास आदि शामिल थे. रात में महादेव राय के घर पर भोजन किया. फुलदेव बाबू के (वर्तमान में जनता सिनेमा कैंपस) में सोये और भोर में मांझा पहुंचे और वहां से धर्मपरसा एक बैठक की. इमलिया गांव के नौबत मियां, हरखुआ के कैलाश पांडेय सहित कई युवा शामिल हुए.

देश ही नहीं, विश्व की अनमोल धरोहर थे नेताजी

आज नेताजी का जन्मदिन है. वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा और जिसके अंदर सनक नहीं होती, वह कभी महान नहीं बन सकता, जैसे नारे आज भी युवाओं में जोश भरते हैं और उन्हें भविष्य का राह दिखाते हैं.

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