बिहार पंचायत चुनाव से पहले बदलाव, नए परिसीमन और आरक्षण रोस्टर से बदल सकते हैं मुखिया, जिला परिषद और सरपंच के चुनावी समीकरण

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उचकागांव में चुनाव को लेकर बीडीओ तथा बीपीआरओ से चर्चा करते प्रतिनिधियों का फाइल फोटो

उचकागांव में चुनाव को लेकर बीडीओ तथा बीपीआरओ से चर्चा करते प्रतिनिधियों का फाइल फोटो

Bihar Panchayat Election Delimitation : बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही नए परिसीमन पर अटकलें तेज हो गई हैं. यह नया परिसीमन मौजूदा प्रतिनिधियों के चुनावी क्षेत्रों और आरक्षण रोस्टर को प्रभावित कर सकता है, जिससे कई नेताओं के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं.

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Bihar Panchayat Election Delimitation : बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सरकार की हालिया घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों और स्थानीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिला परिषद, मुखिया, बीडीसी (पंचायत समिति सदस्य) और सरपंच सहित सभी पदों के लिए आगामी चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराए जाएंगे. इस फैसले के बाद से ही वर्ष 2021 के चुनाव में जीत दर्ज करने वाले मौजूदा प्रतिनिधियों की धड़कनें बढ़ गई हैं और उन्हें अपना चुनावी क्षेत्र बदलने की चिंता सताने लगी है.

नए सिरे से होगा क्षेत्रों का गठन

स्थानीय स्तर पर इस बात को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है कि नए परिसीमन के लागू होने से जिला परिषद से लेकर वार्ड स्तर तक के भौगोलिक समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे. वर्षों से चिह्नित और सुरक्षित माने जा रहे पुराने क्षेत्रों का वजूद बदल सकता है. कई पंचायतें टूट सकती हैं, तो कई नए वार्डों का गठन हो सकता है.ऐसे में जो प्रतिनिधि पिछले कई सालों से किसी खास क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर रहे थे, उन्हें नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ सकती है.

आरक्षण रोस्टर बदलने का डर

परिसीमन का सीधा असर सीटों के आरक्षण पर भी पड़ेगा. क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव के कारण जनसंख्या का अनुपात बदलेगा.जिसके फलस्वरूप आरक्षण रोस्टर भी नए सिरे से तय किया जाएगा. इसका मतलब यह है कि वर्तमान में जो सीटें सामान्य हैं, वे आरक्षित हो सकती हैं और जो आरक्षित हैं, वे सामान्य श्रेणी में आ सकती हैं.

प्रमुख चिंता

क्षेत्र बदलने और आरक्षण रोस्टर में फेरबदल होने से कई कद्दावर प्रतिनिधियों के लिए अपनी परंपरागत सीटों से दोबारा चुनाव लड़ना मुश्किल हो जाएगा.यही वजह है कि वर्तमान मुखिया, सरपंच और जिला परिषद सदस्यों के बीच अपनी राजनीतिक किस्मत को लेकर चर्चाओं और आशंकाओं का दौर लगातार जारी है.

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