गुप्त नवरात्र में थावे सिद्धपीठ पर उमड़ेगा आस्था का सैलाब, गोपालगंज में तंत्र साधना के लिए देशभर से पहुंचेंगे साधक

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थावे सिद्धपीठ गोपालगंज

Gopalganj Thawe Temple Gupt Navratri 2026 : बिहार के प्रसिद्ध सिद्धपीठ थावे मंदिर में आषाढ़ गुप्त नवरात्र के दौरान इस बार श्रद्धालुओं और तंत्र साधकों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है. 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक चलने वाले गुप्त नवरात्र को लेकर मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं ने तैयारियां शुरू कर दी हैं.

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Gopalganj Thawe Temple Gupt Navratri 2026 : बिहार के प्रसिद्ध सिद्धपीठ थावे मंदिर में आषाढ़ गुप्त नवरात्र के दौरान इस बार श्रद्धालुओं और तंत्र साधकों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है. 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक चलने वाले गुप्त नवरात्र को लेकर मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. धार्मिक मान्यता है कि मां सिंहासनी के दरबार में श्रद्धा से की गई पूजा-अर्चना और साधना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा तंत्र-मंत्र की दुर्लभ सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं.

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कामाख्या से भक्त रहषु की पुकार पर थावे आई थीं मां

थावे मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित संजय पांडेय ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार भक्त रहषु की पुकार पर मां कामाख्या सिंह पर सवार होकर थावे पहुंची थीं और यहीं मां सिंहासनी के रूप में विराजमान हुईं. इसी कारण थावे को तंत्र साधकों का प्रमुख सिद्धपीठ माना जाता है. गुप्त नवरात्र के दौरान यहां देश के विभिन्न हिस्सों से साधक विशेष साधना के लिए पहुंचते हैं.

दर्शन मात्र से सुख-समृद्धि मिलने की मान्यता

मुख्य पुजारी के अनुसार गुप्त नवरात्र में मां सिंहासनी के दर्शन और विधि-विधान से पूजा करने पर सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य, आरोग्य और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है. तंत्र साधकों के लिए यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस अवधि में की गई साधना को अत्यंत फलदायी बताया गया है.

गुप्त नवरात्र क्यों माना जाता है खास

ज्योतिषाचार्य पंडित राजेश्वरी मिश्र ने बताया कि सामान्य नवरात्र जहां परिवार की सुख-शांति और मंगलकामना के लिए मनाया जाता है, वहीं गुप्त नवरात्र तंत्र-मंत्र और गहन आध्यात्मिक साधना का पर्व माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार इन नौ दिनों में विधिपूर्वक की गई साधना से रुके हुए कार्य पूरे होते हैं और साधकों को विशेष सिद्धियां प्राप्त होती हैं.

दस महाविद्याओं की होती है विशेष पूजा

गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के बजाय दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है. इनमें मां काली, तारा, त्रिपुरा सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरा भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार इनकी पूजा गुप्त रूप से करना अधिक फलदायी माना जाता है.

गोपनीय साधना से मिलता है शीघ्र फल

ज्योतिषाचार्य पंडित ओम तिवारी ने बताया कि गुप्त नवरात्र की साधना को जितना गोपनीय रखा जाता है, उसका फल उतना ही शीघ्र प्राप्त होता है. यही कारण है कि कई तांत्रिक और साधक इन दिनों एकांत स्थानों, जंगलों, श्मशान या बंद कक्ष में साधना करते हैं.

15 जुलाई से शुरू होगा गुप्त नवरात्र

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई को दोपहर 3:12 बजे से प्रारंभ होकर 15 जुलाई को प्रातः 11:50 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार गुप्त नवरात्र की शुरुआत 15 जुलाई से होगी और 23 जुलाई को इसका समापन होगा.

जानिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

  • घटस्थापना: 15 जुलाई.
  • घटस्थापना मुहूर्त: प्रातः 6:01 बजे से 10:17 बजे तक.
  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:11 बजे से 4:52 बजे तक.
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:45 बजे से 3:40 बजे तक.
  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 7:20 बजे से 7:40 बजे तक.
  • अमृत काल: दोपहर से सायं 5:27 बजे तक.

Gopalganj News : गुप्त नवरात्र को लेकर थावे मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, कलश स्थापना और साधना की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. श्रद्धालुओं के साथ-साथ तंत्र साधकों के बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना है.

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