गोपालगंज: अविश्वास प्रस्ताव पर नहीं हुआ मतदान, प्रस्ताव हुआ खारिज
Published by : YUVRAJ RATAN Updated At : 30 May 2026 8:00 PM
अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद जश्न मनाते लोग
Gopalganj News : मांझा में राजनीतिक समीकरण बरकरार, भविष्य की राजनीति पर सबकी नजर
Gopalganj News (अखिल कुमार) : मांझा प्रखंड प्रमुख वाजिद अली के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव शनिवार को पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण खारिज हो गया. प्रखंड कार्यालय के सभागार में आयोजित विशेष बैठक में अपेक्षित संख्या में पंचायत समिति सदस्य उपस्थित नहीं हुए, जिसके चलते न तो प्रस्ताव पर चर्चा हो सकी और न ही मत विभाजन की प्रक्रिया पूरी हो पाई.इस घटनाक्रम के बाद प्रमुख वाजिद अली ने लगातार तीसरी बार अपनी कुर्सी बचाने में सफलता हासिल की.जानकारी के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में मांझा प्रखंड प्रमुख के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर विचार करने तथा मत विभाजन कराने के लिए शनिवार को विशेष बैठक बुलाई गई थी.
26 सदस्यीय मांझा प्रखंड में दो-तिहाई समर्थन न मिलने से प्रस्ताव कमजोर पड़ा
बैठक को लेकर पूरे प्रखंड क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी तेज थी.समर्थक और विरोधी दोनों पक्षों की नजरें इस बैठक पर टिकी हुई थीं. लोगों के बीच यह चर्चा थी कि बैठक में क्या फैसला होगा और प्रमुख की कुर्सी सुरक्षित रहेगी या नहीं. निर्धारित समय पर प्रखंड कार्यालय के सभागार में बैठक प्रारंभ की गई. बैठक की अध्यक्षता कार्यपालक पदाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) विनित कुमार ने की. लेकिन बैठक शुरू होते ही यह स्पष्ट हो गया कि अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पक्ष को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका है. कुल 26 पंचायत समिति सदस्यों वाले मांझा प्रखंड में अविश्वास प्रस्ताव पर विचार और मत विभाजन के लिए कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक थी.
केवल चार सदस्यों की मौजूदगी से अविश्वास प्रस्ताव हुआ निष्फल
नियमों के अनुसार बैठक को वैध बनाने के लिए 18 पंचायत समिति सदस्यों का उपस्थित होना अनिवार्य था.हालांकि बैठक में मात्र चार पंचायत समिति सदस्य ही उपस्थित हुए. आवश्यक संख्या पूरी नहीं होने के कारण बैठक की औपचारिकता पूरी करने के बाद मत विभाजन की प्रक्रिया नहीं कराई जा सकी. पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार पर्याप्त संख्या में सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण अविश्वास प्रस्ताव स्वतः निरस्त माना गया. इसके साथ ही प्रमुख वाजिद अली के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया.
कोरम पूरा न होने से बैठक हुई निरस्त
बैठक के बाद बीडीओ विनित कुमार ने बताया कि मांझा प्रखंड में कुल 26 पंचायत समिति सदस्य हैं.अविश्वास प्रस्ताव पर विचार करने और मतदान कराने के लिए कम से कम 18 सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक थी. लेकिन बैठक में केवल चार सदस्य ही पहुंचे. आवश्यक कोरम पूरा नहीं होने के कारण मत विभाजन नहीं कराया जा सका और नियमों के तहत अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया. इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रमुख समर्थकों में खुशी का माहौल देखा गया. बैठक समाप्त होने के बाद समर्थकों ने एक-दूसरे को बधाई दी और इसे प्रमुख के प्रति सदस्यों के विश्वास का प्रमाण बताया. समर्थकों का कहना था कि पंचायत समिति के अधिकांश सदस्यों ने बैठक से दूरी बनाकर यह स्पष्ट कर दिया कि वे प्रमुख के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव के पक्ष में नहीं हैं.
मांझा में राजनीतिक समीकरणों पर विराम, बैठक के बाद स्थिति साफ
वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बैठक में सदस्यों की कम उपस्थिति यह दर्शाती है कि अविश्वास प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया. प्रखंड राजनीति में पिछले कुछ समय से प्रमुख पद को लेकर खींचतान चल रही थी. इसी क्रम में प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. हालांकि शनिवार को हुई बैठक के परिणाम ने इस विवाद पर फिलहाल विराम लगा दिया है. गौरतलब है कि मांझा प्रखंड प्रमुख वाजिद अली के खिलाफ इससे पहले भी राजनीतिक स्तर पर कई बार विरोध की आवाजें उठती रही हैं. लेकिन हर बार वे अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने में सफल रहे हैं. इस बार भी अविश्वास प्रस्ताव को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी और इसे प्रमुख के राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा था. हालांकि बैठक में अपेक्षित संख्या में सदस्यों की अनुपस्थिति ने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया.
अविश्वास प्रस्ताव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा
स्थानीय लोगों के बीच भी इस बैठक को लेकर काफी उत्सुकता थी. सुबह से ही प्रखंड कार्यालय परिसर में पंचायत प्रतिनिधियों, समर्थकों और आम नागरिकों की आवाजाही बनी रही. बैठक के बाद जैसे ही अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने की जानकारी सामने आई, राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा तेज हो गई. विशेषज्ञों का कहना है कि पंचायत राज व्यवस्था में अविश्वास प्रस्ताव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके माध्यम से निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपने नेतृत्व के प्रति सदस्यों का विश्वास साबित करना होता है.लेकिन इसके लिए निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है. मांझा प्रखंड में भी पर्याप्त संख्या में सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी.
मांझा की राजनीति में प्रमुख की पकड़ मजबूत
अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद अब प्रमुख वाजिद अली का कार्यकाल पहले की तरह जारी रहेगा. प्रखंड के विकास कार्यों और पंचायत समिति की बैठकों का संचालन उनके नेतृत्व में होता रहेगा.वहीं विरोधी पक्ष के लिए यह परिणाम एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है. शनिवार को हुए इस घटनाक्रम के साथ मांझा प्रखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है. अविश्वास प्रस्ताव के असफल होने से प्रमुख वाजिद अली ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत साबित की है. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में प्रखंड की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और पंचायत समिति के भीतर राजनीतिक समीकरण किस प्रकार आकार लेते हैं.
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