गोपालगंज पुलिस को डिजिटल साक्ष्य जुटाने की मिली ट्रेनिंग, हैश वैल्यू और फॉरेंसिक जांच के सिखाये तरीके

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डिजिटल साक्ष्य पर विशेष प्रशिक्षण, अनुसंधान को प्रशिक्षण की तस्वीर

गोपालगंज पुलिस को डिजिटल साक्ष्य जुटाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया. इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आधुनिक तकनीक का उपयोग कर पुलिस अनुसंधान को मजबूत करना है. अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्य की वैज्ञानिक हैंडलिंग और विश्लेषण की बारीकियां सिखाई गईं.

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गोपालगंज: पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी के निर्देश पर जिला विधि विज्ञान इकाई, गोपालगंज में रविवार को एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस अनुसंधान को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए साक्ष्य आधारित पुलिसिंग को और मजबूत करना रहा. कार्यक्रम का संचालन वरीय विधि विज्ञान वैज्ञानिक प्रणव कुमार राय के मार्गदर्शन में किया गया.

प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले में पदस्थापित सभी प्रशिक्षु पुलिस अवर निरीक्षकों के साथ प्रत्येक थाना से एक-एक पुलिस पदाधिकारी ने हिस्सा लिया. प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधानों के अनुरूप डिजिटल साक्ष्य के वैज्ञानिक तरीके से संकलन, सुरक्षित संरक्षण और उसकी अखंडता बनाये रखने की जानकारी दी गयी.

डिजिटल साक्ष्य जुटाने की सिखायी गयी तकनीक

प्रशिक्षण के दौरान विशेष रूप से डिजिटल साक्ष्य से जुड़ी तकनीकों पर जानकारी दी गयी. अधिकारियों को हैश वैल्यू की गणना, डिजिटल डिवाइस से साक्ष्य निकालने की प्रक्रिया और फॉरेंसिक परीक्षण के विभिन्न तरीकों के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया.

विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल साक्ष्य की सही तरीके से हैंडलिंग बेहद महत्वपूर्ण है. साक्ष्य को सुरक्षित रखने और उसकी अखंडता बनाये रखने से जांच की विश्वसनीयता बढ़ती है. इससे आपराधिक मामलों के अनुसंधान को अधिक सटीक और वैज्ञानिक बनाने में मदद मिलती है तथा न्यायिक प्रक्रिया में भी साक्ष्यों की उपयोगिता मजबूत होती है.

बदलते अपराध के अनुसार तकनीकी दक्षता जरूरी

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि अपराध का स्वरूप लगातार बदल रहा है और आपराधिक गतिविधियों में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है. ऐसे में पुलिस पदाधिकारियों के लिए आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान के तरीकों की जानकारी रखना जरूरी है.

कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों को तकनीकी दक्षता बढ़ाने और डिजिटल साक्ष्यों के वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल पर जोर दिया गया. अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ेगी और मामलों के अनुसंधान की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार आयेगा.

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मनीष राज

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