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शीशम के पेड़ों में लग रहा फंगस, किसान परेशान

Updated at : 24 Nov 2025 6:55 PM (IST)
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शीशम के पेड़ों में लग रहा फंगस, किसान परेशान

बरौली. करीब एक दशक पहले किसानों के खेतों में लगे शीशम के पेड़ अचानक हीं सूखने लगे थे, जिससे किसानों के चेहरे मुरझा गये थे.

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बरौली. करीब एक दशक पहले किसानों के खेतों में लगे शीशम के पेड़ अचानक हीं सूखने लगे थे, जिससे किसानों के चेहरे मुरझा गये थे. उन पेड़ों को हटा देने के बाद किसानों ने नये सिरे से अपने खेतों में शीशम का पेड़ बड़े अरमान से लगाया क्योंकि शीशम का पेड़ किसानों की अर्थव्यवस्था को काफी हद तक संभालता है. लेकिन जैसे-जैसे ये पेड़ बड़े हो रहे हैं, इनमें में सूखने की बीमारी लग रही है, जिसे देखकर किसान काफी चिंतित हैं. कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क के बाद उनके द्वारा इसे फंगस बताया जा रहा है लेकिन वैज्ञानिकों के काफी प्रयास के बाद भी शीशम के पेड़ों में फंगस का कहर नहीं रुक पा रहा है. इससे किसान बेहाल हैं. एक दशक पूर्व शीशम के पेड़ में यह बीमारी महामारी के रूप में आरंभ हुई. उस समय किसानों के 75 फीसदी शीशम के छोटे से लेकर बड़े पेड़ सूख गये, जिससे किसानों की कमर ही टूट गईयी. आज भले ही सरकार व विभिन्न विभाग पेड़ लगाने पर जोर दे रहे हैं पर नये लगाये गये शीशम के पेड़ों को सूखने से बचाने के लिए सार्थक पहल की जरूरत है जिसकी कहीं कोई चर्चा नहीं है. मालूम हो कि फंगस शीशम के पेड़ में ज्यादा पकड़ता है. इसमें पेड़ पहले उपरी भाग से सूखना आरंभ होता है. पत्ते लाल होकर झड़ते चले जाते हैं. पेड़ की जड़ व धड़ में पपरी छोड़ने लगता है. फिर पौधा कुछ माह के बाद पूर्ण रूप से सूख जाता है. इसके बाद इसका उपयोग भले ही किसान जबरन फर्नीचर बनाने में करते हैं पर यह ज्यादा दिनों तक नहीं रह पाता है. इस संबंध में किसान राजाराम सिंह, पंकज साह, वीरेन्द्र सिंह, चिरंजीवी सिंह आदि कहते हैं कि पहले सखुआ, सागवान आदि की लकड़ी आम लोगों को नहीं मिल पाती थी, शीशम का ही फर्नीचर ज्यादा तैयार होता था. चाहे अपने उपयोग के लिए हो या फिर शादी में उपहार के लिए पूर्व में पलंग, कुर्सी, टेबल, घर का दरवाजा, चौखट, खिड़की तथा घर में उपयोग होने वाले पीढ़ा से लेकर अनेक प्रकार के सामान शीशम से ही बनते थे. आज भी शीशम का क्रेज है और किसान खुशहाल रहे इसके लिये किसानों की तरफ कृषि विभाग व सरकार का ध्यान देना जरूरी है. शीशम के पेड़ सूखते चले जा रहे हैं. दवा देने के बाद भी बीमारी रुकने का नाम नहीं ले रही है. किसान चौतरफा मार झेलने को विवश हैं. इस संबंध में कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि शीशम का सूखना फंगस के कारण है किसान इस बीमारी के लिए हीनोसान पांच एमएल दवा एक लीटर पानी में, टीपौल आधा एमएल एक लीटर पानी में या फिर तीसी का तेल मिला कर पेड़ों में दें. इससे फंगस पर काबू पाया जा सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANJAY TIWARI

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By SANJAY TIWARI

SANJAY TIWARI is a contributor at Prabhat Khabar.

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