लाश को मिले तिरंगा, तो मर कर भी जी जाऊंगा

Published at :08 May 2017 6:51 AM (IST)
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लाश को मिले तिरंगा, तो मर कर भी जी जाऊंगा

गोपालगंज : संडे की शाम हास्य व व्यंग्य की फुहारों से महफिल सराबोर हो गयी. मौका था शहर के सिनेमा रोड में स्थित आशीर्वाद वाटिका में प्रभात खबर की तरफ से आयोजित हास्य कवि सम्मेलन का. कवि सम्मेलन में देश के नामचीन कवियों ने अपनी रचनाओं से सामाज को एक नयी दिशा दिखाने का काम […]

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गोपालगंज : संडे की शाम हास्य व व्यंग्य की फुहारों से महफिल सराबोर हो गयी. मौका था शहर के सिनेमा रोड में स्थित आशीर्वाद वाटिका में प्रभात खबर की तरफ से आयोजित हास्य कवि सम्मेलन का.
कवि सम्मेलन में देश के नामचीन कवियों ने अपनी रचनाओं से सामाज को एक नयी दिशा दिखाने का काम किया. उद्घाटन समारोह में आये मुख्य अतिथि मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रामअवध प्रसाद ने कहा कि आयोजन काफी सराहनीय कदम है. ख्याति प्राप्त कवि दिनेश बाबरा ने कुछ ही पल की एक कहानी सुन कर अगर अभिमन्यु चक्रव्यूह तोड़ कर अंदर जा सकता है, तो दिन रात गाना सुननेवाला बच्चा गाना नहीं गा सकता.
जयपुर से पहुंचे कवि अशोक चारण ने देश के वर्तमान हालात पर अपनी रचना ‘ये जहरीला घूंट कसम से हंस कर पी जाऊंगा, मेरी लाश को मिले तिरंगा, तो मर कर भी जी जाऊंगा’…चार घंटे तक चले कवि सम्मेलन में साहित्य, हास्य, व्यंग के साथ-साथ वर्तमान परिवेश का भी चित्रण हुआ. कवि सम्मेलन में दिल्ली की पद्मिनी शर्मा, उत्तर प्रदेश के अखिलेख द्विवेदी, मध्यप्रदेश के अशोक सुंदरानी आदि ने अपनी रचना पेश की.
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